MP News: Blinkit के बैग में कैसे हो रही थी शराब की होम डिलीवरी, जानिए, भोपाल में आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई
राजधानी भोपाल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने ऑनलाइन डिलीवरी सिस्टम और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फल-सब्जी और किराने का सामान बेचने वाली प्रतिष्ठित ऑनलाइन कंपनी Blinkit के बैग का इस्तेमाल एक युवक द्वारा अवैध शराब की होम डिलीवरी के लिए किया जा रहा था।
शातिर दिमाग और नई सोच का काला खेल तब सामने आया जब आबकारी विभाग ने 4 दिन तक रेकी कर युवक को रंगे हाथों धर दबोचा। उसके कब्जे से 31 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की गई, जिसकी बाजार कीमत लगभग 3.70 लाख रुपए बताई जा रही है।

चार दिन की रेकी, फिर मारा जाल
आबकारी विभाग को कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि भोपाल के करोंद क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार जोरों पर है। सूत्रों ने बताया कि एक युवक Blinkit के हरे-पीले बैग में शराब की होम डिलीवरी कर रहा है। इस जानकारी ने आबकारी अधिकारियों के कान खड़े कर दिए। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने तुरंत एक विशेष टीम गठित की और मामले की तह तक जाने के लिए सख्त निर्देश दिए।
आबकारी विभाग की टीम ने करोंद के शिवनगर में रहने वाले संतोष अग्रवाल पर नजर रखनी शुरू की। चार दिन तक चली गहन रेकी में अधिकारियों ने संतोष की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी। वे उसके घर के आसपास, उसकी डिलीवरी रूट्स, और यहां तक कि उसके मोबाइल कॉल्स तक को ट्रैक करते रहे। 14 मई की सुबह, जब पुख्ता सबूत मिल गए, आबकारी विभाग ने करोंद में बड़ी दबिश दी। संतोष के घर से 31 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की गई, जिसमें कई नामी ब्रांड्स की बोतलें शामिल थीं। शराब की अनुमानित कीमत 3.70 लाख रुपये बताई जा रही है।
वृत प्रभारी अधिकारी चंदरसिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संतोष के खिलाफ मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) और 34(2) के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद संतोष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
MP news Blinkit: बैग का 'शराबी' खेल, ऐसा था संतोष का मॉडस ऑपरेंडी
पूछताछ में संतोष ने जो खुलासा किया, वह किसी जासूसी फिल्म से कम नहीं था। उसने बताया कि वह Blinkit के डिलीवरी बैग का इस्तेमाल शराब की होम डिलीवरी के लिए करता था। ये बैग अलग-अलग साइज के थे, जिसमें वह शराब की बोतलें आसानी से छिपा लेता था। बाहर से देखने में लगता था कि वह किराना या सब्जी डिलीवर कर रहा है, लेकिन बैग के अंदर होती थीं अंग्रेजी शराब की बोतलें। संतोष ने यह भी कबूला कि वह ऑर्डर और पेमेंट के लिए ऑनलाइन ऐप्स का इस्तेमाल करता था। ग्राहक ऑनलाइन पेमेंट करते, और वह निर्धारित समय पर शराब उनके घर पहुंचा देता।

संतोष के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए, जिनमें कॉल रिकॉर्ड और मैसेजेस की जांच की जा रही है। आबकारी अधिकारी चंदरसिंह ने बताया, "इन मोबाइल्स से हमें शराब के इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिल सकती है। हम इस रैकेट की पूरी चेन तोड़ने के लिए काम कर रहे हैं।" संतोष ने यह भी खुलासा किया कि वह पिछले कई महीनों से इस धंधे में था और उसने भोपाल के कई पॉश इलाकों में शराब की डिलीवरी की थी।
आबकारी विभाग का मास्टरस्ट्रोक
यह कार्रवाई भोपाल आबकारी विभाग के लिए एक बड़ी कामयाबी है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने इस ऑपरेशन की निगरानी खुद की और टीम को हरसंभव संसाधन उपलब्ध कराए। आबकारी अधिकारियों ने बताया कि संतोष की रेकी के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि वह भागने या सबूत मिटाने की कोशिश न कर सके। दबिश के दौरान संतोष के घर से शराब की पेटियां व्यवस्थित ढंग से स्टोर की हुई मिलीं, जो दर्शाता है कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रैकेट था।
Blinkit पर सवाल, कंपनी की क्या भूमिका?
इस घटना ने Blinkit की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि संतोष Blinkit का कर्मचारी था या उसने सिर्फ उनके बैग का इस्तेमाल किया। आबकारी विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है। Blinkit के बैग का इस्तेमाल इस तरह के अवैध कारोबार के लिए करना कंपनी की ब्रांडिंग और विश्वसनीयता के लिए बड़ा झटका है।
Blinkit की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक, कंपनी इस मामले की आंतरिक जांच शुरू कर चुकी है। यह भी संभावना है कि Blinkit अपने डिलीवरी पार्टनर्स और बैग के इस्तेमाल पर नए दिशा-निर्देश जारी करे।
संतोष अग्रवाल: कौन है यह 'शराबी डिलीवरी बॉय'?
संतोष अग्रवाल (उम्र करीब 30 साल) करोंद के शिवनगर का रहने वाला है। पूछताछ में उसने बताया कि वह पहले छोटे-मोटे काम करता था, लेकिन अवैध शराब का धंधा शुरू करने के बाद उसकी कमाई कई गुना बढ़ गई थी। वह भोपाल के पॉश इलाकों, जैसे अरेरा कॉलोनी, कोहेफिजा, और एमपी नगर में शराब की डिलीवरी करता था। उसका मॉडस ऑपरेंडी इतना चालाकी भरा था कि वह पुलिस और आबकारी विभाग की नजरों से बचता रहा।
आबकारी अधिकारियों को शक है कि संतोष अकेले नहीं, बल्कि एक बड़े शराब माफिया नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। उसके मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप चैट्स की फोरेंसिक जांच से इस रैकेट के अन्य सदस्यों का पता चल सकता है। यह भी जांच का विषय है कि संतोष को इतनी बड़ी मात्रा में शराब कहां से मिल रही थी।
कानूनी कार्रवाई, जेल की सैर
संतोष के खिलाफ मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) और 34(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत अवैध शराब की बिक्री और परिवहन के लिए 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। संतोष को 14 मई को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। उसकी जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है, लेकिन पुख्ता सबूतों के चलते जमानत मिलना मुश्किल माना जा रहा है।
आबकारी विभाग ने संतोष के घर से बरामद शराब को सील कर दिया है और उसकी कीमत का आकलन कर लिया है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह शराब किन-किन ब्रांड्स की थी और इसे भोपाल में कैसे सप्लाई किया गया।
भोपाल में शराब माफिया, पुरानी समस्या
भोपाल में अवैध शराब का कारोबार कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ सालों में आबकारी विभाग ने कई बार बड़ी कार्रवाइयां की हैं। 2023 में कोलार क्षेत्र में 20 पेटी शराब के साथ एक तस्कर को पकड़ा गया था। 2024 में बैरसिया में एक गोदाम से 50 लाख रुपये की शराब बरामद हुई थी। लेकिन Blinkit जैसे ब्रांडेड बैग का इस्तेमाल कर शराब की डिलीवरी का यह पहला मामला है, जिसने सबको चौंका दिया।
आबकारी विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन डिलीवरी सिस्टम का दुरुपयोग शराब माफिया के लिए नया हथियार बन गया है। शहरी इलाकों में डिमांड ज्यादा होने के कारण तस्कर ऐसे नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
Blinkit के लिए चुनौती, प्रशासन के लिए सबक
यह घटना Blinkit जैसी ऑनलाइन डिलीवरी कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगर उनके बैग और ब्रांड का दुरुपयोग इस तरह होता रहेगा, तो ग्राहकों का भरोसा टूट सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कंपनियों को अपने डिलीवरी सिस्टम में सख्त मॉनिटरिंग और कर्मचारियों की बैकग्राउंड चेकिंग को और मजबूत करना होगा।
आबकारी विभाग और भोपाल प्रशासन के लिए यह कार्रवाई एक उपलब्धि है, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। संतोष जैसे छोटे खिलाड़ियों के पीछे बड़े शराब माफिया हो सकते हैं, जिन तक पहुंचना अभी बाकी है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने कहा, "हम अवैध शराब के कारोबार को जड़ से खत्म करेंगे। कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।"
सवाल और मांगें
- Blinkit की जवाबदेही: क्या कंपनी इस दुरुपयोग की जांच करेगी? नए नियम कब लागू होंगे?
- शराब माफिया: संतोष के पीछे बड़ा नेटवर्क कौन चला रहा है? आबकारी विभाग कब तक पहुंचेगा?
- ऑनलाइन सिस्टम: डिलीवरी ऐप्स में अवैध सामान की डिलीवरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
- प्रशासन: भोपाल में और कितने ऐसे रैकेट चल रहे हैं? अगली कार्रवाई कब?
शराब की बोतल, कानून की जीत
भोपाल के इस 'शराबी' Blinkit कांड ने ऑनलाइन डिलीवरी की चमक पर एक काला धब्बा लगा दिया। संतोष अग्रवाल का चालाकी भरा खेल आबकारी विभाग की सतर्कता के आगे धराशायी हो गया। 31 पेटी शराब, दो मोबाइल, और एक जेल की सैर-यह कहानी संतोष के लिए तो अंत है, लेकिन शराब माफिया के खिलाफ लड़ाई अभी जारी है।












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