हाउसिंग सोसाइटियों में प्रॉपर्टी पर सरकार की सख्ती, अब सहकारिता विभाग की क्लीयरेंस के बाद ही होगी रजिस्ट्री
राजधानी भोपाल की सैकड़ो हाउसिंग सोसायटियों में अब सरकार का हस्तक्षेप शुरू हो गया है। हाउसिंग सोसाइटियों की रजिस्ट्री में सहकारिता विभाग की क्लेरेंस लेना अब जरूरी हो गया है। बिना इसके पंजीयन विभाग प्लॉट की रजिस्ट्री नहीं करेगा। कहीं किसी ऐसे व्यक्ति को रजिस्ट्री ना हो जाए जो पात्रता नहीं रखता है इसलिए पंजीयन विभाग में यह कदम उठाया है।
कुछ महीने में ही एक दर्जन से अधिक रजिस्ट्री की क्लीयरेंस लेने के लिए विभाग के पास भेजी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि एक बार रजिस्ट्री होने के बाद मामला कोर्ट से नारिपटता है। इस वजह से पहले ही सतर्कता बरती जा रही है। ऐसे में अब सहकारिता विभाग से ओके लेना जरूरी होगा।

शहर में 476 हाऊसिंग सोसाइटियां
भोपाल शहर में 500 से अधिक सोसाइटियां वर्तमान में एक्टिव है। इसमें से करीब 100 से अधिक सोसाइटियों के संबंध में जांच चल रही है अब तक आधा दर्जन से अधिक सोसाइटियों की रजिस्ट्री पर सहकारिता विभाग की तरफ से रोक लगाई जा चुकी है। इसके बाद भी लोग दस्तावेजों से हेरा फेरी कर रजिस्ट्री करने से बाज नहीं आ रहे हैं। समिति की रजिस्ट्री करने से पहले पंजीयन दिनांक और उसे समय की मूल सदस्यता सूची अनिवार्य है अगर किसी समिति का पंजीयन 1990 में हुआ है तो उसी के समय के आसपास की सदस्यता सूची मान्य है। अगर कोई 2010 या इसके बाद सदस्य बना है तो उसकी क्लीयरेंस सहकारिता विभाग देगा ताकि सही व्यक्ति को रजिस्ट्री हो सके।
कई सोसाइटी में गड़बड़ी, पुराने सदस्यों को हटाकर नए को जोड़ा
बीते कुछ महीने से सहकारिता विभाग द्वारा शहर के तमाम हाउसिंग सोसाइटियों की जांच कराई जा रही है प्रारंभिक स्तर की जांच में पता चल रहा है कि पुराने सदस्यों को हटाकर 20 साल बाद नए सदस्यों की एंट्री दिखाकर अब रजिस्ट्री कराई जा रही है। समिति की तरफ से दिए जाने वाले आवंटन पत्र की जांच की जा रही है ऐसी तमाम गड़बड़ियों से बचने के लिए शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सहकारिता विभाग ने भी तेजी से काम शुरू कर दिया है ताकि सही और हकदार सदस्य के साथ अन्याय ना हो सके।












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