नागपुर में एक और बच्चे की मौत से आंकड़ा पहुंचा 18, जानिए 'कोल्ड्रिफ' सिरप ने कैसे चुराई मासूमों की सांसें—पूरा
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में जहरीली कफ सिरप 'कोल्ड्रिफ' की त्रासदी ने एक नया दर्दनाक मोड़ ले लिया है। नागपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाजरत 1.5 साल की मासूम धानी डेहरिया ने दम तोड़ दिया। किडनी फेलियर से हुई इस मौत ने कुल आंकड़े को 18 तक पहुंचा दिया है।
तामिया क्षेत्र की यह बच्ची भी डॉ. प्रवीण सोनी के प्राथमिक इलाज में शिकार हुई, जिन्होंने उसे वही घातक सिरप पिलाया जो पहले 17 बच्चों की जान ले चुका था। यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का आईना है, बल्कि दवा माफिया और सरकारी निगरानी की मिलीभगत को उजागर कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हो चुकी है, CBI जांच की मांग हो रही है, और विपक्ष सड़क पर उतर आया है। आइए जानते हैं इस हत्याकांड का पूरा काला अध्याय।
नागपुर में धानी की दर्दनाक मौत-'कोल्ड्रिफ' ने फिर ली जान
नागपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मंगलवार सुबह धानी डेहरिया ने अंतिम सांस ली। मात्र डेढ़ साल की यह मासूम छिंदवाड़ा के तामिया क्षेत्र के डेहरिया गांव की रहने वाली थी। अगस्त के अंत में खांसी-जुकाम से पीड़ित धानी को स्थानीय डॉक्टर प्रवीण सोनी ने 'कोल्ड्रिफ' सिरप लिखा। कुछ ही दिनों में बच्ची की हालत बिगड़ गई-उल्टी, दस्त, कमजोरी, और फिर किडनी फेलियर। परिवार ने उसे तत्काल छिंदवाड़ा के जिला अस्पताल ले जाया, जहां से नागपुर रेफर किया गया। वहां वेंटिलेटर पर लड़ी धानी, लेकिन विषाक्त रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) ने उसके छोटे फेफड़ों और किडनी को नष्ट कर दिया।
धानी की मां राधा डेहरिया ने रोते हुए बताया, "बच्ची को सिरप पिलाने के बाद वह रोने लगी। हमने सोचा दवा काम करेगी, लेकिन वह मरने लगी। डॉक्टर साहब ने कहा था, 'यह अच्छी दवा है।' अब मेरी धानी चली गई।" परिवार ने मुआवजे की मांग की, लेकिन सरकारी सहायता का इंतजार है। यह मौत छिंदवाड़ा कांड की 18वीं कड़ी है, जो साबित करती है कि 'कोल्ड्रिफ' का जहर अब भी फैल रहा है। डॉ. सोनी, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, पर अब और केस दर्ज होंगे।
मौतों का काला आंकड़ा: 18 मासूमों का सफाया, जिलेवार बंटवारा
- छिंदवाड़ा जिला: 15 मौतें (परासिया, तामिया, चौरई, सौंसर क्षेत्रों से)।
- पांढुर्णा: 1 मौत।
- बैतूल: 2 मौतें।
- कुल: 18 मौतें।
इसके अलावा, राजस्थान के भरतपुर और सीकर में 3 बच्चे शिकार बने, जबकि नागपुर और बैतूल के अस्पतालों में कई बच्चे वेंटिलेटर पर हैं। जांच में पाया गया कि सभी बच्चों को 'कोल्ड्रिफ' सिरप दिया गया, जिसमें 48.6% DEG मौजूद था। यह रसायन वाहन उद्योग में ब्रेक फ्लूइड के रूप में इस्तेमाल होता है, लेकिन दवाओं में मिलावट से किडनी और लीवर को नष्ट कर देता है।
कैसे हो रही मौतें? 'कोल्ड्रिफ' का जहर-एक घातक साजिश
'कोल्ड्रिफ' सिरप तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बनाया गया था। कंपनी पर आरोप है कि सस्ते पैसे के चक्कर में उन्होंने प्रोपाइलीन ग्लाइकॉल की जगह DEG मिला दिया। यह विषाक्त रसायन शरीर में घुलकर एक्यूट ट्यूबुलर नेक्रोसिस पैदा करता है-किडनी की ट्यूब्स नष्ट हो जाती हैं, मेटाबॉलिज्म रुक जाता है, और बच्चे दर्द से तड़पकर मर जाते हैं।
जांच रिपोर्ट्स के अनुसार:
- लक्षण: सिरप पिलाने के 24-48 घंटों में उल्टी, दस्त, कमजोरी, पेशाब बंद।
- कारण: DEG किडनी फिल्टर को ब्लॉक कर देता है। बच्चों के छोटे शरीर में यह तेजी से फैलता है।
- फैक्ट्री की लापरवाही: NDTV की रिपोर्ट में फैक्ट्री में गंदगी, जंग लगे उपकरण, और अनट्रेंड वर्कर्स का खुलासा। गैस स्टोव पर केमिकल्स गर्म किए जाते थे, जो सेफ्टी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन है।
डॉ प्रवीण सोनी का रोल सबसे विवादास्पद: परासिया के 'अपना मेडिकल स्टोर' से जुड़े सोनी ने सैकड़ों बच्चों को यह सिरप लिखा। जांच में पाया गया कि स्टोर में पंजीकृत फार्मासिस्ट नहीं था, और अवैध वितरण हो रहा था। सोनी की पत्नी ज्योति सोनी स्टोर की मालकिन हैं। पुलिस अब परिवार की फार्मेसी पर फोकस कर रही है।
बैन, सस्पेंशन, लेकिन देरी पर सवाल
मध्य प्रदेश सरकार ने तत्काल 'कोल्ड्रिफ' पर बैन लगाया, लेकिन मौतों के बाद। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने क्लीन चिट देने के बाद सफाई दी, लेकिन अब 3 अधिकारियों-डिप्टी कंट्रोलर और 2 ड्रग इंस्पेक्टर्स-को सस्पेंड किया गया। ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को ट्रांसफर कर दिया गया।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने छिंदवाड़ा दौरा कर पीड़ित परिवारों से मिले, लेकिन कांग्रेस ने इसे "दिखावा" बताया। केंद्र सरकार ने भी एडवाइजरी जारी की-2 साल से कम बच्चों को कफ सिरप न दें। गुजरात और हरियाणा में भी इंस्पेक्शन शुरू।
विपक्ष का आक्रोश: PIL, आंदोलन, और 'सरकारी हत्या' का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने परासिया में अनशन किया और स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की। उन्होंने कहा, "यह सरकारी हत्या है।" सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल हो चुकी है, जिसमें CBI जांच और न्यायिक आयोग की मांग है।
व्यापक संकट: दवा माफिया का साम्राज्य
यह पहला कांड नहीं। 2023 में भी DEG से 100+ मौतें हुईं। मध्य प्रदेश में 138 अमानक दवाएं पाई गईं। विशेषज्ञ कहते हैं: "ड्रग लैब्स कमजोर, टेस्टिंग में देरी।" कंपनी पर एफआईआर, लेकिन मालिक फरार। SIT जांच जारी है।
पीड़ित परिवारों की पुकार: न्याय और मुआवजा
धानी के पिता रामू डेहरिया ने कहा, "4 लाख मुआवजा क्या? 1 करोड़ दो, और दोषियों को फांसी।" अन्य परिवार भी इलाज खर्च और जॉब की मांग कर रहे। अस्पतालों में 10+ बच्चे लड़ रहे।
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