Bhopal: स्मार्ट मीटर के खिलाफ बिजली क्रांति, 6 अक्टूबर को अंबेडकर पार्क में उमड़ेगी हजारों उपभोक्ताओं की भीड़

मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं का सब्र अब जवाब दे रहा है। स्मार्ट मीटरों की मार से त्रस्त लाखों परिवारों ने एकजुट होकर 6 अक्टूबर को भोपाल के डॉ. अंबेडकर पार्क में ऐतिहासिक प्रदर्शन का ऐलान किया है। मध्यप्रदेश बिजली उपभोक्ता एसोसिएशन (एमईसीए) के बैनर तले प्रदेशभर से हजारों उपभोक्ता जुटेंगे, और सरकार से 11 मांगें मनवाने का संकल्प लेंगे - जिसमें 200 यूनिट बिजली मुफ्त, बिजली दरों में भारी कटौती और स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाने की प्रमुख है।

शुक्रवार को संगठन की बैठक में रणनीति तैयार की गई, जहां पदाधिकारियों ने साफ कहा, "यह विरोध राजनीतिक नहीं, बल्कि जीवन-मरण का सवाल है।" हाल के दिनों में भोपाल से ग्वालियर, गुना तक बिलों की बाढ़ ने आम आदमी को गहने-बर्तन बेचने पर मजबूर कर दिया है।

Electricity revolution against smart meters thousands of consumers to gather at Ambedkar Park on October 6

6 अक्टूबर को 'बिजली बचाओ' का महा प्रदर्शन

एमईसीए की प्रदेश संयोजक रचना अग्रवाल और लोकेश शर्मा ने बताया, "6 अक्टूबर को सुबह 10 बजे डॉ. अंबेडकर पार्क में उपभोक्ता जुटेंगे। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित सभी जिलों से बसें भेजी जा रही हैं। हम धरना देंगे, ज्ञापन सौंपेंगे और अगर जरूरी हुआ तो रेल रोको आंदोलन भी करेंगे।" बैठक में मुदित भटनागर, सतीश ओझा, आरती शर्मा जैसे पदाधिकारी मौजूद थे। संगठन का दावा है कि 50,000 से अधिक उपभोक्ता हिस्सा लेंगे।

प्रदर्शन की 11 मांगें हैं:

  • हर घर को 200 यूनिट बिजली मुफ्त।
  • बिजली दरों में 50% कटौती।
  • स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाकर पुराने मीटर लगाएं।
  • प्री-पेड सिस्टम बंद, पोस्ट-पेड बहाल।
  • TOD (टाइम ऑफ डे) रेटिंग समाप्त।
  • बिलों में पारदर्शिता, हार्ड कॉपी अनिवार्य।
  • कनेक्शन कटौती पर 350 रुपये जुर्माना हटाएं।
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट रिफंड।
  • मीटर खराबी पर मुफ्त रिप्लेसमेंट।
  • उपभोक्ता शिकायत निवारण तंत्र मजबूत।
  • बिजली चोरी पर सख्ती, लेकिन उपभोक्ताओं को राहत।

अग्रवाल ने कहा, "यह आंदोलन देशव्यापी है। मध्य प्रदेश में 1 करोड़ से अधिक स्मार्ट मीटर लग चुके हैं, लेकिन बिलों की मार आम आदमी को कुचल रही है।"

स्मार्ट मीटर का 'धोखा': बिलों की बाढ़, जीवन पर संकट

स्मार्ट मीटरों को 'आधुनिकता' का नाम देकर लगाया गया, लेकिन उपभोक्ताओं के लिए यह 'बिजली का बोझ' बन गया। प्री-पेड सिस्टम मोबाइल रिचार्ज जैसा है - बैलेंस खत्म होते ही बिजली कट। सेंट्रल सिस्टम से कंट्रोल होने से यूनिट्स में हेरफेर संभव। TOD रेटिंग से दिन-रात अलग बिल। मीटर खराब तो नया खरीदो, जुर्माना दो। हार्ड कॉपी न मिले, तो अशिक्षितों का क्या? हर बिल न भरने पर 350 रुपये जुर्माना, जबकि सिक्योरिटी पहले से जमा।

बैठक में उपभोक्ताओं ने अपनी कहानियां साझा कीं। भोपाल के एक निवासी का बिल 700 से 10,000 रुपये पहुंचा। दूसरे का 20,000, तीसरे का 29,000। ग्वालियर में एक कमरे के घर का बिल 5,000! वहां 3 उपभोक्ताओं को महीने में दो बार 6-6 हजार के बिल। गुना में किसान को 2 लाख का बिल - गहने बेचे। सीहोर, विदिशा, सतना, इंदौर, देवास, दमोह, जबलपुर में 700-800 के बिल हजारों में बदल गए। लोग कहते हैं, "बिजली चोरों को पकड़ो, लेकिन हमें क्यों सजा?"

शर्मा ने कहा, "यह विरोध स्वार्थी नहीं। मीटर से बिलिंग में 20-30% बढ़ोतरी हो रही है। कंपनी को फायदा, उपभोक्ता को नुकसान।" विशेषज्ञों का मत: स्मार्ट मीटर डेटा चोरी का खतरा भी।

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