MP News: बापचा गांव में "पाले वाले" महाराज के श्रद्धालु परेशान, सड़क और पुलिया की बदहाली से ग्रामीण नाराज

MP News: मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार सड़क निर्माण और विकास के बड़े-बड़े दावे करती रही है, लेकिन राजधानी भोपाल से मात्र 60 किलोमीटर दूर शाजापुर तहसील के कालापीपल क्षेत्र में स्थित बापचा गांव की स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। गणेशपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस गांव में न तो पक्की सड़क है और न ही एक सुरक्षित पुलिया, जिसके कारण ग्रामीणों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश के मौसम में तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जहां पानी के भराव के कारण ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट जाता है। हाल ही में एक मासूम बच्चे की मौत और कई ग्रामीणों के घायल होने की घटनाओं ने इस समस्या की गंभीरता को और उजागर किया है। वन इंडिया हिंदी की ग्राउंड रिपोर्ट ने इस बदहाली को सामने लाया, जिसके बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठ रहे हैं। आइए, इस मुद्दे की पूरी कहानी विस्तार से जानते हैं।

Devotees of Paale Wale Maharaj in Bapcha village of Kalapipal are upset there is no fund for road

बापचा गांव: पालेवाले महाराज मंदिर और श्रद्धालुओं की भीड़

बापचा गांव, जो भोपाल से 60 किलोमीटर दूर शाजापुर तहसील की काला पीपल पंचायत में स्थित है, अपने पालेवाले महाराज मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। हर गुरुवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। मंदिर में अर्जी लगाने की परंपरा के कारण यह स्थान धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। लेकिन, मंदिर तक पहुंचने वाली सड़क और पास की पुलिया की बदहाल स्थिति ने न केवल स्थानीय ग्रामीणों, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है।

वन इंडिया हिंदी के संवाददाता लक्ष्मी नारायण मालवीय ने ग्राउंड जीरो पर जाकर इस स्थिति का जायजा लिया। उनकी रिपोर्ट में सामने आया कि मंदिर के पास की कच्ची सड़क और टूटी-फूटी पुलिया इतनी खतरनाक है कि हादसों का डर हर समय बना रहता है। सड़क के किनारे बड़े-बड़े पत्थर और गड्ढे हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल है। बारिश के मौसम में तो यह रास्ता पूरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिससे ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का आवागमन ठप हो जाता है।

Devotees of Paale Wale Maharaj in Bapcha village of Kalapipal are upset there is no fund for road

बारिश में टूटी सड़क और पुलिया बनीं जानलेवा

ग्रामीणों ने वन इंडिया हिंदी को बताया कि बारिश के दौरान सड़क और पुलिया के पास इतना पानी भर जाता है कि गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से कट जाता है। एक हृदयविदारक घटना में, पानी के भराव के कारण एक ग्रामीण अपने बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं ले जा सका, जिसके चलते ब्रेन हेमरेज से उसकी मौत हो गई। एक अन्य ग्रामीण ने बताया कि खराब सड़क के कारण वह गिर गया और उसका पैर फ्रैक्चर हो गया। ऐसी कई घटनाएं इस क्षेत्र में आम हैं, जहां सड़क की बदहाली के कारण लोग घायल हो रहे हैं या जान गंवा रहे हैं।

ग्रामीण रामस्वरूप मालवीय ने कहा, "हमारे गांव की सड़क और पुलिया की हालत इतनी खराब है कि बारिश में तो हम कहीं आ-जा नहीं सकते। मेरे बच्चे की जान इसी वजह से चली गई। हमने कई बार अधिकारियों और नेताओं से शिकायत की, लेकिन कोई सुनता नहीं।"

Devotees of Paale Wale Maharaj in Bapcha village of Kalapipal are upset there is no fund for road

ग्रामीणों की शिकायतें: जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता

बापचा गांव के निवासियों ने इस समस्या को लेकर बार-बार स्थानीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी, सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी, और जिला प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने बताया कि विधायक ने केवल आश्वासन दिए, लेकिन सड़क और पुलिया निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

कलेक्टर कार्यालय में कई बार आवेदन देने के बाद ग्रामीणों को जवाब मिला कि सड़क निर्माण के लिए फंड उपलब्ध नहीं है। यह जवाब ग्रामीणों के लिए निराशाजनक था, क्योंकि मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार पिछले 18 साल से सत्ता में है और विकास के बड़े-बड़े दावे करती रही है। ग्रामीणों का गुस्सा अब इस कदर बढ़ गया है कि उन्होंने आगामी चुनावों में वोट न देने की चेतावनी दी है।

एक ग्रामीण शिवनारायण ने गुस्से में कहा, "हमने हर बार बीजेपी को वोट दिया, लेकिन बदले में हमें सिर्फ जुमले मिले। न सड़क बनी, न पुलिया। अब हम किसी जनप्रतिनिधि को वोट नहीं देंगे।"

वन इंडिया हिंदी की ग्राउंड रिपोर्ट: खुलासा और प्रभाव

वन इंडिया हिंदी के संवाददाता लक्ष्मी नारायण मालवीय की ग्राउंड रिपोर्ट ने बापचा गांव की इस गंभीर समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। उनकी रिपोर्ट में सड़क और पुलिया की बदहाल स्थिति, ग्रामीणों की परेशानियां, और एक मासूम की मौत की मार्मिक कहानी को सामने लाया गया। इस खबर ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया है।

यह पहली बार नहीं है जब वन इंडिया हिंदी की पत्रकारिता ने प्रशासन को कार्रवाई के लिए प्रेरित किया है। हाल ही में अयोध्या नगर बायपास पर शराब दुकान के पास अतिक्रमण और शराबियों की समस्या को उनकी खबर के बाद नगर निगम ने त्वरित कार्रवाई की थी। बापचा गांव की इस खबर के बाद भी ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर अब ध्यान दिया जाएगा।

मध्य प्रदेश में सड़कों की स्थिति: बड़े दावों की हकीकत

मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और अन्य परियोजनाओं के तहत सड़क निर्माण के लिए अरबों रुपये खर्च करने का दावा किया है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत भी कई सड़कों का निर्माण हुआ, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों, खासकर छोटे गांवों जैसे बापचा में स्थिति बदहाल है। एक्स पर कई पोस्ट्स में भी इस मुद्दे को उठाया गया है:

रविश नाम के एक युवक ने सोशल मीडिया पर लिखा, "नदी उफान पर है, और कुछ लोग बैलगाड़ी में एक गर्भवती महिला को नदी पार करवा रहे हैं - क्योंकि सड़क ही नहीं है। 30 वर्षों से मध्य प्रदेश में BJP की सरकार है, लेकिन आज भी लोगों को अस्पताल पहुँचने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ती है।"

@AnumaVidisha ने टिप्पणी की, "मध्यप्रदेश में इसे 'बेशरम' के नाम से जाना जाता है। आम जनता ठीक से समझ ले कि BJP के राज में सड़कें केवल विदेशों से आने वाले सैलानियों को दिखाने के लिए बनेंगी।"

इन पोस्ट्स से साफ है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों की बदहाली को लेकर जनता में भारी नाराजगी है। भोपाल जैसे शहरी क्षेत्रों में भी सड़कों पर गड्ढों की समस्या को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लिखा, "भोपाल की 7.1 किमी सड़क पर 2140 गड्ढे, रोज़ाना लाखों लोग जोखिम में!"

प्रशासनिक और राजनीतिक जवाबदेही की कमी

बापचा गांव की समस्या केवल सड़क और पुलिया तक सीमित नहीं है; यह प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को भी दर्शाती है। कलेक्टर शाजापुर और सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी को कई बार इस मुद्दे की जानकारी दी गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने भी केवल आश्वासन दिए, जिससे ग्रामीणों का भरोसा टूट रहा है।

काला पीपल क्षेत्र में सड़क निर्माण के लिए फंड की कमी का हवाला देना भी सवाल उठाता है। मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकार ने 6198.88 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे जैसे सड़क और पुलिया के लिए फंड की कमी का दावा समझ से परे है।

ग्रामीणों की मांग और समाधान के सुझाव

बापचा गांव के निवासियों ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:

पक्की सड़क का निर्माण: मंदिर और गांव को जोड़ने वाली सड़क को पक्का किया जाए।

पुलिया का पुनर्निर्माण: बारिश में जलभराव रोकने के लिए मजबूत और सुरक्षित पुलिया बनाई जाए।

नियमित निगरानी: सड़क और पुलिया की स्थिति की नियमित जांच और रखरखाव।

तत्काल फंड आवंटन: सड़क और पुलिया निर्माण के लिए तुरंत बजट आवंटित किया जाए।

स्वास्थ्य सुविधाएं: आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचने के लिए बेहतर व्यवस्था।

ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना या मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत इस गांव को शामिल किया जाए। साथ ही, जिला पंचायत और नगर निगम को इस क्षेत्र में नियमित निरीक्षण करने का निर्देश दिया जाए।

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