MP News: आखिर कब नियमित होंगे अतिथि शिक्षक? भोपाल के अंबेडकर पार्क में जुटे हजारों शिक्षक, जानिए पूरा मामला
MP News Bhopal: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अंबेडकर मैदान, तुलसी नगर आज हजारों अतिथि शिक्षकों की आवाज से गूंज उठा। नियमितीकरण, अवकाश नीति, और अन्य मांगों को लेकर प्रदेश भर से आए शिक्षकों ने 'गुरु दक्षिणा' कार्यक्रम के तहत एक विशाल प्रदर्शन किया।
यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश सरकार का ध्यान अतिथि शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं की ओर खींचने का एक प्रयास है। 18 सालों से अनिश्चितता और नौकरी की असुरक्षा का दंश झेल रहे ये शिक्षक अब अपनी आवाज को बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है, ताकि वे शिक्षकों की मांगों को सुन सकें और ठोस नीति बनाकर उनकी समस्याओं का समाधान करें। लेकिन सवाल वही है-आखिर कब नियमित होंगे अतिथि शिक्षक? आइए, इस आंदोलन, इसकी मांगों, और इसके पीछे की कहानी को विस्तार से समझते हैं।
'गुरु दक्षिणा' कार्यक्रम: शिक्षकों की पुकार
'गुरु दक्षिणा' के बैनर तले आयोजित यह प्रदर्शन अतिथि शिक्षकों का सरकार को अपनी मांगों के प्रति जागरूक करने का एक अनूठा प्रयास है। आजाद अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष पुष्कर (सिंगरौली) ने बताया कि यह आयोजन पुलिस की एनओसी के तहत अंबेडकर मैदान में हो रहा है। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाना है। हम वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं, लेकिन हमें न तो स्थायी नौकरी मिली है और न ही बुनियादी सुविधाएं। यह प्रदर्शन हमारी मांगों को गंभीरता से लेने के लिए सरकार को मजबूर करेगा।"
अतिथि शिक्षक समन्वय संघ के प्रतिनिधि सुनील सिंह परिहार ने बताया कि इस प्रदर्शन में प्रदेश के सभी जिलों से हजारों शिक्षक शामिल हुए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री को एक प्रस्ताव सौंपा जाएगा, जिसमें शिक्षकों की प्रमुख मांगों को रेखांकित किया गया है। यह प्रदर्शन न केवल एक मांगपत्र है, बल्कि उन शिक्षकों की पीड़ा का प्रतीक है, जो वर्षों से अस्थायी स्थिति में काम कर रहे हैं।

अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगें
- नियमितीकरण की स्पष्ट नीति: अतिथि शिक्षकों ने मांग की है कि जिस तरह पूर्व में 'गुरुजी' शिक्षकों को नियमित किया गया था, उसी तर्ज पर उनके लिए भी एक पारदर्शी नीति बनाई जाए। सुनील सिंह परिहार ने कहा, "हमने 18 साल तक शिक्षा व्यवस्था को संभाला है। अब हमें स्थायी नौकरी का हक मिलना चाहिए।"
- नौकरी की सुरक्षा: सीधी भर्ती, प्रमोशन, या अन्य भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को सेवा से बाहर न किया जाए। कई शिक्षकों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के नौकरी से हटाया गया है, जो अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
- अवकाश नीति: अतिथि शिक्षकों ने मांग की है कि उन्हें नियमित शिक्षकों की तरह 13 कैजुअल लीव (CL) और 3 अर्जित अवकाश (EL) सहित एक स्पष्ट अवकाश नीति दी जाए। पुष्कर ने कहा, "हम भी शिक्षक हैं, लेकिन हमें बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा गया है। अवकाश नीति हमारा हक है।"
- सेवा की मान्यता: 18 सालों से सेवा दे रहे शिक्षकों को उनकी अनुभव और योगदान के आधार पर प्राथमिकता दी जाए।

शिक्षकों की पीड़ा: 18 साल की अनिश्चितता
मध्य प्रदेश में 70,000 से अधिक अतिथि शिक्षक वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। ये शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन इन्हें न तो स्थायी नौकरी मिली है और न ही नियमित शिक्षकों जैसे लाभ। सुनील सिंह परिहार ने कहा, "हमने अपनी जवानी शिक्षा को समर्पित कर दी, लेकिन बदले में हमें अनिश्चितता और असुरक्षा मिली। कई शिक्षकों को बिना कारण हटा दिया गया। यह अन्याय कब तक चलेगा?"
पिछले प्रदर्शनों में भी अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगें उठाई थीं। 10 सितंबर 2024 को भोपाल में हुए एक प्रदर्शन में 8,000 से अधिक शिक्षकों ने हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के वादों की याद दिलाई थी। शिवराज ने 2 सितंबर 2023 को एक पंचायत में वादा किया था कि अतिथि शिक्षकों को नियमित किया जाएगा और उन्हें बेहतर वेतनमान दिया जाएगा। लेकिन यह वादा अब तक अधूरा है।
सरकार और शिक्षकों के बीच तनाव
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के हालिया बयान ने आंदोलन को और हवा दी है। उन्होंने कहा था, "मेहमान बनकर आए हो, तो क्या घर पर कब्जा करोगे?" इस बयान की कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की और माफी की मांग की।
वहीं, 27 सितंबर 2024 को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक फैसला लिया, जिसमें कहा गया कि अतिथि शिक्षकों को सीधे नियमित नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें सीधी भर्ती में 25% आरक्षण दिया जाएगा। इस फैसले ने शिक्षकों में मिश्रित प्रतिक्रिया पैदा की। कुछ शिक्षकों ने इसे राहत माना, जबकि अन्य ने इसे "अधूरी जीत" करार दिया। पुष्कर ने कहा, "25% आरक्षण कोई समाधान नहीं है। हम पूर्ण नियमितीकरण चाहते हैं।"
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव
आज के प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने सख्ती बरती। अंबेडकर मैदान के चारों ओर बैरेकेडिंग की गई, और कुछ सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने गोली चलाने की चेतावनी भी दी थी। 2 अक्टूबर 2024 को हुए एक प्रदर्शन में भी पुलिस और शिक्षकों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें कई शिक्षक घायल हो गए थे। सुनील सिंह परिहार ने कहा, "हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। पुलिस की सख्ती हमें डराने के लिए है, लेकिन हम अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे।"
आजाद अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष केसी पवार ने चेतावनी दी, "अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानती, तो हम आमरण अनशन पर बैठेंगे। सरकार इसके लिए जिम्मेदार होगी।"
कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। जीतू पटवारी ने कहा, "अतिथि शिक्षकों के साथ अन्याय हो रहा है। सरकार उनके योगदान को नजरअंदाज कर रही है।" जवाब में BJP प्रवक्ता आलोक दुबे ने कहा, "सरकार शिक्षकों की मांगों पर विचार कर रही है। 25% आरक्षण का फैसला इसका प्रमाण है। जल्द ही और कदम उठाए जाएंगे।"
क्या है समाधान?
अतिथि शिक्षकों की मांगें नई नहीं हैं। 2007 से शुरू हुई अतिथि शिक्षक व्यवस्था ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन, इस व्यवस्था ने शिक्षकों को कम वेतन, अनिश्चित भविष्य, और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं में उलझा दिया है।
शिक्षा विशेषज्ञ डॉ अनिल शर्मा ने कहा, "अतिथि शिक्षकों का नियमितीकरण एक जटिल मुद्दा है। सरकार को एक ऐसी नीति बनानी होगी, जो अनुभवी शिक्षकों को प्राथमिकता दे और साथ ही नई भर्तियों के लिए भी जगह बनाए।" उन्होंने सुझाव दिया कि विभागीय परीक्षा और अनुभव आधारित स्कोर कार्ड के जरिए नियमितीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सकता है।
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