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Datia News: बाल विवाह के खिलाफ प्रशासन का बड़ा एक्शन, टेंट–डीजे–हलवाई तक पर FIR

दतिया जिले में बाल विवाह रोकने को लेकर प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त और मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया है। ग्राम खटोला में नाबालिग वर-वधू के विवाह का मामला सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने उनाव थाना पुलिस के साथ संयुक्त रूप से छापामार कार्रवाई कर दी।

यह पूरी कार्रवाई कलेक्टर स्वप्रिल वानखाड़े के स्पष्ट निर्देशों के तहत की गई, जिसने पूरे जिले में एक कड़ा संदेश दे दिया है-बाल विवाह अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Datia Administration takes action against child marriage FIR against tent-DJ-confectioner

जानकारी के अनुसार, कार्रवाई के समय तक विवाह की रस्में पूरी हो चुकी थीं और नाबालिग वधू की विदाई की तैयारियां जोरों पर थीं। जैसे ही प्रशासन को पुख्ता सूचना मिली, टीम तत्काल गांव पहुंची। विदाई में शामिल वाहनों को गांव से बाहर निकलते ही बीच रास्ते में घेर लिया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

टीम ने सबसे पहले वर और वधू के उम्र से संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच में सामने आया कि दोनों ही विवाह योग्य उम्र से कम हैं। दस्तावेजों की पुष्टि होते ही प्रशासन ने बिना कोई देरी किए बालिका को रेस्क्यू किया और उसे तत्काल बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां आगे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू की गई।

इस कार्रवाई की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि प्रशासन ने सिर्फ परिजनों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि बाल विवाह को अंजाम देने में शामिल हर उस व्यक्ति को कटघरे में खड़ा कर दिया, जिसने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस गैरकानूनी कृत्य में भूमिका निभाई। विवाह में सेवाएं देने वाले हलवाई, टेंट संचालक, डीजे संचालक और पंडित-सभी के खिलाफ बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत FIR दर्ज की गई है।

अधिकारियों का साफ कहना है कि बाल विवाह केवल परिवार की गलती नहीं, बल्कि इसे संभव बनाने वाले सेवा प्रदाता भी उतने ही दोषी हैं। इसी सोच के तहत यह कार्रवाई की गई, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति या व्यवसायिक सेवा प्रदाता ऐसे मामलों में शामिल होने से पहले सौ बार सोचे।

प्रशासनिक अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जिले में बाल विवाह को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई गई है। चाहे सामाजिक दबाव हो या परंपरा की आड़-कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

इस छापामार कार्रवाई के बाद जिलेभर में हड़कंप मच गया है। वहीं, सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन के इस कदम की सराहना करते हुए इसे बाल अधिकारों की दिशा में एक बड़ा और साहसिक फैसला बताया है।

दतिया प्रशासन की यह कार्रवाई न केवल जिले, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक कड़ा संदेश है-
बाल विवाह अपराध है, और इसमें शामिल हर हाथ कानून के शिकंजे में आएगा।

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