Bhopal News: पत्रकार कुलदीप सिंगरोलिया की गिरफ्तारी को लेकर विवाद, कटारा हिल्स थाना प्रभारी को लाइन अटैच
भोपाल में पत्रकार कुलदीप सिंगरोलिया की गिरफ्तारी ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। राजधानी के कटारा हिल्स थाने के बाहर मंगलवार को शहर भर के पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जिसमें कुलदीप सिंगरोलिया के खिलाफ दर्ज किए गए प्रकरण को झूठा बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
पत्रकारों का आरोप है कि पुलिस ने बिना ठोस सबूत के कुलदीप को गिरफ्तार किया और गिरफ्तारी के बाद उन्हें रिहा भी नहीं किया गया, जिससे यह मामला राजनीतिक और पुलिसिया दबाव का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

पत्रकार कुलदीप सिंगरोलिया की गिरफ्तारी और उसके बाद बढ़ते विवाद के बीच पुलिस ने कटारा हिल्स थाना प्रभारी गोपाल शुक्ला को लाइन अटैच कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस कमिश्नर द्वारा की गई है, जिससे इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
बीजेपी और पत्रकारों का समर्थन
पत्रकार कुलदीप सिंगरोलिया की गिरफ्तारी को लेकर बीजेपी प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल सहित कई पत्रकार साथी भी पुलिस मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने कटारा हिल्स थाने में पत्रकार कुलदीप के खिलाफ दर्ज किए गए मामले को लेकर विरोध दर्ज कराया और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना था कि पुलिस ने बिना ठोस सबूत के कुलदीप सिंगरोलिया को गिरफ्तार किया, और यह गिरफ्तारी किसी राजनीतिक दबाव का हिस्सा हो सकती है।
{image-whatsappimage2025-03-25at17-35-22-1742904812.jpg hindi.oneindia.com]क्या था मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब फरियादी शेख अकील ने 20 मार्च को टीला जमालपुर थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, एक सफेद बोलेरो गाड़ी ने उनकी स्कूटी को टक्कर मारी, और फिर गाड़ी में सवार कुछ लोगों ने उन्हें धमकाकर 50,000 रुपए की मांग की और मारपीट की। इस मामले में गाड़ी के मालिक और आरोपियों के नाम के तौर पर कुलदीप सिसोदिया का नाम दर्ज किया गया था। बाद में, जब पुलिस ने मामले की जांच की, तो FIR में पत्रकार कुलदीप सिंगरोलिया का नाम भी शामिल कर दिया गया।
पत्रकारों का आरोप है कि कुलदीप सिंगरोलिया के पास न तो वह गाड़ी है और न ही वे घटनास्थल पर मौजूद थे। ऐसे में यह सवाल उठता है कि उन्हें क्यों इस मामले में नामजद किया गया।
गिरफ्तारी पर उठे सवाल
कुलदीप सिंगरोलिया की गिरफ्तारी पर उनके परिजनों और समर्थकों ने कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि पुलिस ने बिना कोई ठोस सबूत पेश किए, और बिना उन्हें पहले से सूचित किए, कुलदीप को आधी रात को गिरफ्तार किया। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनका फोन भी जब्त कर लिया और परिवार व मित्रों को इसकी सूचना भी नहीं दी। इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े किए हैं, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया है।
मंगलवार सुबह से ही कटारा हिल्स थाने के बाहर पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखने को मिला, जिन्होंने कुलदीप सिंगरोलिया की तत्काल रिहाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक दबाव का परिणाम हो सकती है, और इसे किसी भी हालत में जायज नहीं ठहराया जा सकता।
पुलिस की चुप्पी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले में पुलिस के अधिकारी अब तक कुछ भी स्पष्ट बयान देने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि वे मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इंकार किया है। दूसरी ओर, भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने पत्रकारों को बताया कि उच्च अधिकारियों से इस मामले पर बातचीत की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि टीआई को लाइन अटैच कर दिया जाएगा, जो इस पूरे मामले में किसी न किसी रूप में जिम्मेदार थे।
कुलदीप सिंगरोलिया की जमानत
हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कुलदीप सिंगरोलिया को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मामले में गहराई से जांच की जरूरत है। इसके अलावा, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं, और पत्रकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन में भाग लेने वाले पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले के माध्यम से पुलिस और प्रशासन ने मीडिया की आवाज को दबाने की कोशिश की है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।
पुलिस कमिश्नर की कार्रवाई
पुलिस कमिश्नर ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कटारा हिल्स थाना प्रभारी गोपाल शुक्ला को लाइन अटैच कर दिया। पुलिस कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह निर्णय लिया और आदेश दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए। यह कार्रवाई तब हुई जब पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन जारी रखा था, और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।












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