सरकारी हमीदिया कॉलेज के लिए CM शिवराज ने की बड़ी घोषणा, बिल्डिंग को बनाएंगे मॉडल, दूसरे सब्जेक्टस भी जोड़ेंगे
Bhopal Hamidia News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को राजधानी के हमीदिया कॉलेज में साइंस और दूसरे सब्जेक्ट जोड़ने की घोषणा की। मुझे मुख्यमंत्री शिवराज ने कहा कि शासकीय हमीदिया महाविद्यालय का अत्याधुनिक विशाल सर्व सुविधा युक्त भवन बनाया जाएगा। एप्रोच रोड और अन्य कार्य भवन के स्थान के निर्धारण के बाद किए जाएंगे। इसके अलावा महाविद्यालय में आवश्यकता अनुसार नए संकाय भी खुलेंगे।
बता दे आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल के शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित अमृत महोत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां पर उन्होंने शासकीय हमीदिया कॉलेज के लिए कई बड़ी घोषणाएं की।

इस दौरान भोपाल के पूर्व सांसद आलोक संजर ने सीएम शिवराज को उनके समय की फोटो भी दिखाई, जब सीएम शिवराज हमीदिया कॉलेज में पढ़ा करते थे और उनके साथ आलोक संजर भी छात्र राजनीति में साथ में रहे। इस दौरान सीएम चौहान ने कंप्यूटर लैब का शुभारंभ तथा पुस्तकालय भवन का लोकार्पण भी किया।
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इस अवसर पर सीएम शिवराज ने कहा कि एक बात मैं गर्व के साथ कहता हूं कि हमीदिया कॉलेज में एक नहीं बल्कि अनेकों ऐसी हस्तियां पढ़ीं हैं जिन्होंने केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर मुकाम पाया है। उन्होंने कहा कि 1978 में इस कॉलेज के दर्शनशास्त्र में MA किया। पुराने दोस्तों को याद कर सीएम ने गाना गया, एहसान मेरे दिल पर तुम्हारा है दोस्तों यह दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों। कार्यक्रम के अंत में तुझको चलना होगा गीत गया।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सबसे सुखद पल स्कूल और कॉलेज के दिन होते हैं। मैं ABVP में नगर संगठन मंत्री था। सवेरे उठते ही साइकल से पहले सेफिया कॉलेज जाता था। दुबला-पतला था। वहां मोटे-तगड़े छात्र नेता थे। मैं वहां भाषण देता था। वह लोग देखा करते थे कि यह कौन आ गया।
पूर्व विधायक रमेश शर्मा को याद कर भावुक हुए सीएम शिवराज
गुड्डू भैया (पूर्व विधायक रमेश शर्मा) को याद करते हुए सीएम शिवराज बाबू को गए उन्होंने कहा कि हमें जब रात में भूख लगती थी तो उनके मदन महाराज होटल पर जाकर भोजन करते थे। हमीदिया कॉलेज के पीछे चाय की गुमटियां हुआ करती थी। जहां दोपहर में चाय पीकर नमकीन कहते थे। तब हॉस्टल थे तिलक, मालवीय, गोखले, हॉस्टल में रहकर लीला के यहां चाय पिया करते थे। न्यू मार्केट में शाम को लिटिल कॉफी हाउस और समता चौक बैठने के अड्डे थे। वो अद्भुत दिन थे।












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