MP News: छिंदवाड़ा कांड, कफ सिरप में 'डायथिलीन ग्लाइकॉल' का जहर? डॉक्टर राकेश मिश्रा की चेतावनी, जानिए
MP News: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से निकला वह काला साया अब पूरे देश को घेर रहा है। महज 20 दिनों में 9 मासूम बच्चों की किडनी फेलियर से मौत, और राजस्थान के सीकर-भरतपुर में 2 और - कुल 11 जिंदगियां खत्म। शुरुआत सर्दी-जुकाम से हुई, लेकिन अंत कफ सिरप के जहरीले पदार्थ 'डायथिलीन ग्लाइकॉल' से। भोपाल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश मिश्रा ने वन इंडिया हिंदी को बताया, "बच्चों को 15-20 दिन से वायरल इंफेक्शन था।
जिला अस्पताल पहुंचे तो किडनी डैमेज हो चुकी थी। जांच में एक जैसा कफ सिरप मिला, जिसमें मीठा बनाने के लिए इस्तेमाल डायथिलीन ग्लाइकॉल जैसा पदार्थ किडनी को नष्ट कर सकता है।" छिंदवाड़ा प्रशासन ने दो सिरप - कोल्डरिफ और नेक्स्ट्रो-डीएस - पर बैन ठोक दिया, लेकिन सवाल वही: सरकारें क्यों सो रही हैं? एमपी में जांच का इंतजार, राजस्थान में स्वास्थ्य मंत्री का बयान - "मां ही दोषी"।

डॉक्टर राकेश मिश्रा की चेतावनी: "वायरल से किडनी डैमेज, सिरप में छिपा ज़हर"
भोपाल के प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राकेश मिश्रा ने छिंदवाड़ा कांड पर गहन विश्लेषण किया। उन्होंने कहा, "मैंने स्थानीय डॉक्टरों से चर्चा की और न्यूज़ रिव्यू की। बच्चे 15-20 दिन से सर्दी-जुकाम से जूझ रहे थे - एक वायरल इंफेक्शन। जिला अस्पताल पहुंचे तो हालत क्रिटिकल। किडनी इंफेक्शन और फेलियर। इलाज के दौरान मौत। रिसर्च में पता चला कि घर पर एक जैसा कफ सिरप दिया गया। संभावना है कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल जैसा खतरनाक पदार्थ था, जो दवाओं को मीठा बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाता है।"
डॉ मिश्रा ने चेताया, "यह 2018 के गड्ढा घाटी कांड जैसा है, जहां 100+ बच्चे इसी ज़हर से मारे गए। सिरप की जांच जरूरी। माता-पिता सतर्क रहें - डॉक्टर की सलाह बिना न दें।" छिंदवाड़ा में 9 मौतें (20 दिनों में), सभी 1-7 साल के। परिवारों ने बताया, "बुखार-जुकाम पर सिरप दिया, फिर उल्टी-दस्त, किडनी बंद। नागपुर ले गए, लेकिन बचा न सके।"
मौतों का सिलसिला: एमपी में 9, राजस्थान में 2 - सिरप की हिस्ट्री हर जगह
- छिंदवाड़ा (एमपी): 20 दिनों में 9 मौतें। शुरुआत 15 सितंबर से। बच्चे सर्दी से बीमार, सिरप पर इलाज। किडनी फेलियर। एनसीडीसी टीम ने सैंपल लिए। दो सिरप बैन।
- सीकर-भरतपुर (राजस्थान): 2 मौतें। एक 3 साल का, दूसरा 5 साल का। कफ सिरप की हिस्ट्री। आरएमएससीएल ने वितरण रोका, तीन सदस्यीय कमेटी गठित।
परिजनों का आरोप: "निजी अस्पतालों ने देर की। सरकारी जांच सामान्य। सिरप दूषित था।" ICMR रिपोर्ट का इंतजार, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं - डायथिलीन ग्लाइकॉल की मौजूदगी पुष्टि होनी चाहिए।
सरकारों पर सवाल: एमपी में 'जांच', राजस्थान में 'मां दोषी' का बयान
मध्य प्रदेश सरकार का रुख सतर्क: स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा, "ICMR रिपोर्ट का इंतजार। सिरप निर्दोष, मौत वायरल से।" लेकिन विपक्ष ने हमला बोला - "कवर-अप? कंपनी को बचाना?" छिंदवाड़ा कलेक्टर ने बैन लगाया, लेकिन सवाल: दवा लाइसेंसिंग क्यों ढीली?
राजस्थान में स्वास्थ्य मंत्री का बयान हैरान करने वाला: "सरकार निर्दोष, मां ही जिम्मेदार। सिरप सही था, लेकिन देरी से इलाज।" कांग्रेस ने कहा, "शर्मनाक! मां को दोष देकर सरकार बच रही।" राजस्थान में भी सिरप बैन, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट लंबित।
राजनीतिक हंगामा: विपक्ष का हमला, सरकार का बचाव
कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा, "मोहन सरकार की लापरवाही। 11 मौतें, और जांच का बहाना?" भाजपा ने पलटवार - "विपक्ष सियासत कर रहा। पारदर्शी जांच।"












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