MP News: अशोकनगर में भाजपा के दो दिग्गज क्यों हुए आमने-सामने, जानिए पूरी खबर, SI ट्रांसफर को लेकर बड़ा टकराव
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की राजनीति में हंगामा मच गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो बड़े नेताओं के बीच खुली जंग छिड़ गई है। जिला पंचायत अध्यक्ष राव अजय प्रताप सिंह यादव ने ईसागढ़ थाना प्रभारी (SI) मीना रघुवंशी को हटाने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखा है।
मीना रघुवंशी चंदेरी से भाजपा विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी की पुत्रवधू हैं, जो खुद एक प्रभावशाली नेता हैं। अजय प्रताप सिंह ने SI पर भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और राजनीतिक संरक्षण में अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर SI को तत्काल हटाया नहीं गया, तो क्षेत्र में जन आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।

यह विवाद न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचा रहा है, बल्कि प्रदेश भाजपा में भी फूट की आशंका पैदा कर रहा है। एक ही पार्टी के दो नेताओं का यह आमने-सामने आना जिले की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। अशोकनगर, जो ग्वालियर-चंबल संभाग का हिस्सा है, पहले से ही जमीन विवादों और अपराध की खबरों के लिए जाना जाता है। इस पत्र ने न केवल पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे बड़े नेताओं को भी घसीट लिया है। आइए, जानते हैं इस मामले की पूरी परतें, आरोपों से लेकर बचाव तक।
विवाद की जड़: ईसागढ़ थाने में भ्रष्टाचार के आरोप, अवैध गतिविधियों का अड्डा बना इलाका
सोमवार को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में जिला पंचायत अध्यक्ष राव अजय प्रताप सिंह यादव ने ईसागढ़ थाना प्रभारी मीना रघुवंशी पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि SI के राजनीतिक संरक्षण के कारण थाना क्षेत्र में जुआ, सट्टा, अवैध शराब की बिक्री, गांजा-चरस का कारोबार और रिश्वतखोरी जैसी अवैध गतिविधियां खुलेआम फल-फूल रही हैं। पत्र में लिखा गया, "मीना रघुवंशी एक प्रभावशाली जनप्रतिनिधि की पुत्रवधू होने का फायदा उठा रही हैं। वे झूठे मामले दर्ज कर आम जनता से पैसे वसूल रही हैं, जिससे न केवल ग्रामीण परेशान हैं, बल्कि पुलिस विभाग की छवि भी धूमिल हो रही है।"
अजय प्रताप सिंह ने पत्र में विस्तार से उदाहरण दिए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जमीन हड़पने के लिए झूठे मुकदमे लगाए जा रहे हैं, और थाने का पूरा संचालन SI के पति के इशारों पर हो रहा है। "मैं खुद इसी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य हूं। यहां लोगों को काफी परेशान किया जा रहा है। SI के पति के अनुसार ही थाना चलता है। अगर यह नहीं रुका, तो हम जनता के साथ सड़कों पर उतरेंगे।" यह आरोप ईसागढ़ थाने की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़े करते हैं, जो अशोकनगर जिले का एक संवेदनशील इलाका है। जिले में पहले से ही अपराध दर अधिक होने के कारण यह मामला और गंभीर हो जाता है।
अशोकनगर जिला, जो 2003 में ग्वालियर से अलग होकर बना, यहां कृषि और छोटे उद्योग मुख्य हैं। लेकिन ईसागढ़ जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध गतिविधियां लंबे समय से समस्या बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, थाने की निष्क्रियता से अपराधी बेलगाम हो गए हैं। एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "SI साहिबा का रिश्ता विधायक जी से है, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं होती। जुआ-अड्डे रात-दिन चलते रहते हैं।"
सीएम को पत्र के अलावा सिंधिया और आईजी तक पहुंची शिकायत: जन आंदोलन की धमकी
राव अजय प्रताप सिंह ने बताया कि यह उनकी पहली शिकायत नहीं है। उन्होंने पहले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मौखिक रूप से बात की थी, जो ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के प्रभारी हैं। इसके अलावा, सोमवार को ही उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक (IG) को भी पत्र लिखा है। "मैंने सिंधिया जी से फोन पर चर्चा की, लेकिन अब लिखित रूप से सीएम और IG को सूचित किया है। अगर SI को 48 घंटों में हटाया नहीं गया, तो हम क्षेत्रीय स्तर पर जन आंदोलन शुरू करेंगे। पंचायत सदस्य और ग्रामीण तैयार हैं।"
यह पत्र प्रदेश स्तर पर हलचल मचा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, IG ने मामले को गंभीरता से लिया है। अशोकनगर के कलेक्टर और SP को भी निर्देश जारी हो सकते हैं। अजय प्रताप सिंह, जो हाल ही में जिला पंचायत चुनाव में 4500 वोटों से जीते थे, भाजपा के स्थानीय स्तंभ हैं। उनकी यह मांग पार्टी में फूट की आशंका पैदा कर रही है।
एक ही पार्टी में टकराव: जिला पंचायत अध्यक्ष vs चंदेरी विधायक, पुरानी दुश्मनी?
इस मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों नेता - राव अजय प्रताप सिंह और जगन्नाथ सिंह रघुवंशी - भाजपा के ही कद्दावर चेहरे हैं। जगन्नाथ सिंह 2018 से चंदेरी विधानसभा सीट से विधायक हैं, और उनके कार्यकाल में ही मीना रघुवंशी को ईसागढ़ थाने की कमान सौंपी गई थी। मीना, जो उनके बेटे की पत्नी हैं, पुलिस सेवा में कई वर्षों से हैं। अजय प्रताप सिंह की जीत के बाद जिला पंचायत में भी भाजपा का दबदबा है, लेकिन यह विवाद पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़ा कर रहा है।
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह टकराव जिला पंचायत चुनाव के बाद से पनप रहा था। अजय प्रताप सिंह ने जनवरी 2024 में उपचुनाव जीता था, जहां उन्होंने भाजपा समर्थित उम्मीदवार को हराया था। कुछ सूत्रों के अनुसार, यह व्यक्तिगत दुश्मनी का रूप ले चुका है। "दोनों नेता प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने की होड़ में हैं। SI का मुद्दा सिर्फ बहाना है," एक BJP कार्यकर्ता ने कहा।
विधायक का पलटवार: आरोप निराधार, 'कांच के घर वाले पत्थर न फेंकें'
चंदेरी विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "ये आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईसागढ़ थाना प्रभारी द्वारा ऐसा कोई कार्य नहीं किया जा रहा। तत्कालीन SP और वर्तमान SP दोनों के सामने ऐसी कोई शिकायत नहीं आई।" अजय प्रताप सिंह का नाम लिए बिना उन्होंने तंज कसा, "जिनके खुद के घर कांच के होते हैं, वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते। अगर किसी को पागल कुत्ता काट ले, तो उसका इलाज पागलखाने में होता है।"
रघुवंशी ने आगे कहा, "जो लोग दूसरे क्षेत्रों में गड़बड़ियां करते हैं, वे मेरी विधानसभा में नहीं कर पाएंगे। हम अपनी बात उचित फोरम पर उठाएंगे, पब्लिकली कहना नहीं चाहते।" यह बयान विवाद को और भड़का सकता है। विधायक ने MI पर भरोसा जताया, "मीना मेरी बहू हैं, लेकिन वे ड्यूटी पर ईमानदारी से काम करती हैं। यह राजनीतिक साजिश है।"
अशोकनगर का राजनीतिक परिदृश्य: भाजपा में फूट की आशंका, ग्रामीणों में रोष
अशोकनगर जिला भाजपा का गढ़ रहा है, लेकिन आंतरिक कलह अब सतह पर आ रहा है। जिले में 5 विधानसभा क्षेत्र हैं - मुंगावली, अशोकनगर, चंदेरी, बमोरी और मंदसौर। जगन्नाथ सिंह रघुवंशी चंदेरी से मजबूत हैं, जबकि अजय प्रताप सिंह स्थानीय पंचायत स्तर पर प्रभावशाली। यह विवाद आगामी जिला पंचायत चुनावों को प्रभावित कर सकता है। ग्रामीण इलाकों में लोगों का रोष बढ़ रहा है। एक पंचायत सदस्य ने कहा, "अगर थाने में भ्रष्टाचार है, तो कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन पार्टी के नेता आपस में लड़ रहे हैं, जनता का क्या?"
पुलिस विभाग में भी हलचल है। अशोकनगर SP ने कहा, "हम शिकायत की जांच करेंगे। कोई दोषी पाया गया तो कार्रवाई होगी।" लेकिन राजनीतिक दबाव की आशंका से चिंता है।
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