भाजपा की सत्ता बनाए रखने के लिए शिवराज ने किया 'महाराज' की मजबूरियों का विस्तार

भोपाल। मध्य प्रदेश में सीएम शिवराज के कैबिनेट का विस्तार बहुत मशक्कत के बाद आखिरकार हो गया। यह विस्तार 30 जून को ही होना था लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे की मांग के साथ सीएम शिवराज तालमेल नहीं बैठा पा रहे थे जिस वजह से विस्तार टलते-टलते 2 जुलाई को हुआ। 'मंथन से अमृत निकलता है लेकिन विष शिव पी जाते हैं' कैबिनेट विस्तार से एक दिन पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह कहकर सबको इशारे में बता दिया कि क्या होने वाला है और वही हुआ। जिन 28 मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया उनमें सिंधिया गुट के 12 लोग हैं। सिंधिया के दो समर्थक तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह पहले से ही शिवराज की कैबिनेट में हैं। सिंधिया के समर्थकों को मंत्रिमंडल में जगह देने के लिए सीएम शिवराज को अपने समर्थकों और पुराने सहयोगियों को बाहर रखने का 'विष' पीना पड़ा। भाजपा आलाकमान को मनाने की शिवराज ने बहुत कोशिश की लेकिन सिंधिया इस मामले में उन पर भारी पड़े और इसके पीछे उपचुनाव बड़ी वजह है। भाजपा ने सिंधिया गुट को तरजीह देकर उपचुनाव की सीटों को जीतने का दांव खेला है जिसमें शिवराज की मांगों को दरकिनार करना पड़ा है।

उपचुनाव को साधने के साथ-साथ उपेक्षितों को मंत्रिमंडल में जगह

उपचुनाव को साधने के साथ-साथ उपेक्षितों को मंत्रिमंडल में जगह

मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार उपचुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। ग्वालियर चंबल के क्षेत्र में ज्यादा सीटें हैं जिन पर उपचुनाव होने हैं। दलित वोटरों को रिझाने के लिए सिंधिया की समर्थक और कमलनाथ सरकार में भी मंत्री रही इमरती देवी को मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वहीं इलाके के ब्राह्मण मतदाताओं को अपने साथ लाने के लिए मुरैना के गिर्राज दंडोतिया को मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही मंत्रिमंडल में ओम प्रकाश सकलेचा जैसे नाम भी हैं जो शिवराज के काल में उपेक्षितों में गिने जाते रहे हैं। इस बार के मंत्रिमंडल विस्तार में केंद्रीय आलाकमान और सिंधिया की चली, शिवराज की नहीं चली। इस तरह से भाजपा आलाकमान ने सिंधिया और उनके समर्थकों से किए वादे को निभाया है जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। इससे कमलनाथ सरकार गिर गई थी और शिवराज फिर से मुख्यमंत्री बने थे।

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    भाजपा के कई पुराने नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई

    भाजपा के कई पुराने नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई

    भाजपा का सारा ध्यान उपचुनाव पर है इसलिए मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा के कई पुराने नेताओं को जगह नहीं मिल पाई। गौरीशंकर बिसेन, रामपाल सिंह, राजेंद्र शुक्ला जैसे शिवराज के करीबी बड़े नेताओं को लिस्ट में जगह नहीं मिली है। सबसे पहले जो लिस्ट बनाई गई थी उसमें सभी गुटों को अहमियत देते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जगह दी गई थी। शिवराज चाहते थे कि ये सभी मंत्री बनें और इसके लिए उन्होंने पुरजोर कोशिश की लेकिन केंद्रीय आलाकमान के सामने उनकी एक न चली। सिंधिया खेमे से महेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी, राजवर्धन सिंह, बृजेंद्र सिंह यादव, सुरेश धाकड़, गिर्राज दंडोतिया, ओ पी एस भदौरिया, हरदीप सिंह डांग, बिसाहूलाल सिंह और एंदल सिंह कसाना को जगह मिली।

    भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का छलका दर्द

    भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का छलका दर्द

    मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सीएम शिवराज का दर्द छलका वही भाजपा के जिन वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिल पाई वो भी अपना दर्द छुपा ना पाए। उन्होंने कहा कि सिंधिया समर्थकों की वजह से उनका नाम लिस्ट से कट गया, पार्टी आलाकमान का फैसला उनको स्वीकार है। सियासी जानकारों का कहना है कि राजेंद्र शुक्ला, नरेंद्र सिंह तोमर और कैलाश विजयवर्गीय जैसे वरिष्ठ नेताओं के समर्थकों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दिए जाने से पार्टी में असंतोष बढ़ सकता है। विंध्य क्षेत्र में राजेंद्र शुक्ला, ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में नरेंद्र सिंह तोमर और मालवा-निमाड़ क्षेत्र में कैलाश विजयवर्गीय काफी प्रभावी हैं और भाजपा का चुनाव-प्रबंधन संभालते आ रहे हैं। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन वह भी नहीं हुआ।

    कमलनाथ ने मंत्रिमंडल विस्तार पर कसे तंज

    कमलनाथ ने मंत्रिमंडल विस्तार पर कसे तंज

    शिवराज के कैबिनेट के विस्तार पर कमलनाथ ने मंत्रियों को बधाई देते हुए कहा कि इस मंत्रिमंडल में भाजपा ने कई योग्य, अनुभवी, निष्ठावान वरिष्ठ विधायकों को शामिल नहीं किया। कमलनाथ ने ट्वीट कर लिखा कि भाजपा के वरिष्ठ विधायकों के नाम सूची में न पाकर व्यक्तिगत तौर पर उनको दुख है। उन्होंने लिखा कि लोकतंत्र के इतिहास में मध्य प्रदेश का मंत्रिमंडल ऐसा मंत्रिमंडल है जिसमें कुल 33 मंत्रियों में से 14 वर्तमान में विधायक ही नहीं है। यह संवैधानिक व्यवस्थाओं के साथ बड़ा खिलवाड़ है। इसको उन्होंने प्रदेश की जनता के साथ मजाक बताया।

    शिवराज कैबिनेट की पहली मीटिंग

    शिवराज कैबिनेट की पहली मीटिंग

    मंत्रिमंडल के गठन के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रियों के साथ पहली मीटिंग की। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि न मैं चैन से बैठूंगा और न आप लोगों को बैठने दूंगा। उन्होंने सबको काम में जुट जाने को कहा। उन्होंने कैबिनेट को परिवार बताते हुए कहा कि वे सरकार को भी परिवार की तरह चलाते रहे हैं। उन्होंने मंत्रियों को कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करने को कहा। मंत्रियों को उन्होंने सोमवार और मंगलवार को भोपाल में रहने को कहा। साथ ही कहा कि अपने लिए वक्त निकालें। कोरोना काल में उन्होंने किसी प्रकार की भीड़ न जुटाने के लिए भी सावधान किया।

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