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अगर RSS न होता तो इतना भी हिंदू न बचता – बागेश्वर धाम सरकार का बड़ा बयान, संघ के शताब्दी वर्ष में खुली तारीफ

बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज़ में हिंदू समाज को एकजुट होने का संदेश दिया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए उन्होंने संघ की खुलकर तारीफ की और कहा कि आज भारत में अगर हिंदू समाज किसी हद तक संगठित दिखाई देता है, तो इसके पीछे RSS की दशकों की तपस्या है।

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"RSS नहीं होता तो हिंदू पहचान ही खत्म हो जाती"

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंच से स्पष्ट शब्दों में कहा-"भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अगर न होता, तो इतना भी हिंदू न बचता। डॉ. हेडगेवार की परंपरा ने अभूतपूर्व कार्य किया है।" उन्होंने कहा कि संघ ने गांव-गांव, गली-गली जाकर हिंदू समाज को जोड़ने का काम किया है, जो आज किसी आंदोलन से कम नहीं है।

डॉ. हेडगेवार की परंपरा को बताया 'संजीवनी'

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को याद करते हुए कहा कि- संघ कोई राजनीतिक संगठन नहीं। बल्कि यह हिंदू चेतना को जगाने वाला सांस्कृतिक आंदोलन है, जिसने समाज में सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभाव को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि संघ की शाखाओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी हिंदुओं को अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म से जोड़े रखा।

"गांव-गांव जाकर संघ ने हिंदुओं को जगाया"

बागेश्वर धाम सरकार ने कहा- "संघ ने न कभी सत्ता मांगी, न श्रेय की चिंता की। उसने बस काम किया - गांव-गांव, गली-गली, हर घर तक पहुंचकर।"उनके मुताबिक आज जो धार्मिक जागरण, मंदिर आंदोलन, सामाजिक सेवा और राष्ट्रवादी सोच दिख रही है, उसके बीज संघ ने ही बोए थे।

हिंदू समाज को दिया एकजुटता का संदेश

  • अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हिंदू समाज से आह्वान करते हुए कहा कि-
  • अब समय आ गया है कि हिंदू आपसी मतभेद भूलें
  • जाति, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठें
  • और राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के लिए एकजुट हों
  • उन्होंने कहा कि "हिंदू अगर बंटा रहेगा तो सुरक्षित नहीं रहेगा।"
  • राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। समर्थक इसे हिंदू समाज के आत्मविश्वास की आवाज़ बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे वैचारिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहे हैं।

RSS के शताब्दी वर्ष में बढ़ी गतिविधियां

  • गौरतलब है कि RSS अपने शताब्दी वर्ष के मौके पर देशभर में-
  • सामाजिक समरसता कार्यक्रम
  • सेवा कार्य
  • वैचारिक गोष्ठियां
  • और जनसंपर्क अभियान चला रहा है
  • इसी कड़ी में बागेश्वर धाम सरकार का यह बयान संघ के लिए एक मजबूत वैचारिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान सिर्फ एक भाषण नहीं, बल्कि हिंदू समाज को आत्ममंथन और संगठन की दिशा में सोचने का संदेश माना जा रहा है। RSS के शताब्दी वर्ष में आया यह बयान आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन सकता है।

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