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MP News: संस्कृति बचाओ मंच की बकरीद पर इको-फ्रेंडली अपील, चंद्रशेखर तिवारी ने मांग मिट्टी के बकरों की कुर्बानी

भोपाल में संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बकरीद 2025 के लिए इको-फ्रेंडली कुर्बानी की मांग की। मिट्टी के बकरों की प्रतीकात्मक कुर्बानी से पशु हत्या, प्रदूषण, और पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है। पशु क्रूरता अधिनियम का हवाला देते हुए शहर काजी को पत्र लिखा। पूरी खबर पढ़ें।

भोपाल, 29 मई 2025: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बकरीद 2025 (ईद-उल-अजहा) के लिए एक अभूतपूर्व अपील की है।

Appeal on Bakrid in madhya pradesh Chandrashekhar Tiwari demands sacrifice of clay goats

उन्होंने मुस्लिम धर्मगुरुओं और शहर काजी से मांग की है कि इस बार खून-खराबे के बजाय मिट्टी के इको-फ्रेंडली बकरों की प्रतीकात्मक कुर्बानी दी जाए। तिवारी ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि जब इको-फ्रेंडली होली, दीपावली, और गणेश प्रतिमाएं संभव हैं, तो बकरीद को भी पर्यावरण और पशु हित में बदला जा सकता है।

चंद्रशेखर तिवारी की अपील: मुख्य बिंदु

संस्कृति बचाओ मंच ने 28 मई 2025 को भोपाल के शहर काजी को एक पत्र लिखकर इको-फ्रेंडली बकरीद का संदेश देने की अपील की। चंद्रशेखर तिवारी ने अपने बयान में कहा, "जब होली में रासायनिक रंगों की जगह प्राकृतिक रंग, दीपावली में पटाखों की जगह दिए, और गणेश चतुर्थी में प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह मिट्टी की मूर्तियां इस्तेमाल हो सकती हैं, तो बकरीद में मिट्टी के बकरों की प्रतीकात्मक कुर्बानी क्यों नहीं हो सकती?"

उनके तर्क:

  • पशु हत्या पर रोक: बकरीद पर लाखों बकरों की कुर्बानी से पशु क्रूरता बढ़ती है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत पशुओं के खिलाफ क्रूरता दंडनीय है, फिर मुस्लिम समुदाय को बकरा हत्या की छूट क्यों?
  • पर्यावरण संरक्षण: कुर्बानी से लाखों गैलन खून और अपशिष्ट नदियों और नालों में बहता है, जिससे प्रदूषण और पानी की बर्बादी होती है। मिट्टी के बकरे इस समस्या को खत्म करेंगे।
  • बच्चों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव: तिवारी ने दावा किया कि बच्चे बकरों को काजू, किशमिश, और बादाम खिलाकर पालते हैं, लेकिन ईद के दिन उनकी हत्या करवाने से उनके मन में हिंसा और हत्या की मंशा जागृत होती है।
  • प्रतीकात्मक कुर्बानी: मिट्टी के बकरों की कुर्बानी से परंपरा का सम्मान होगा, लेकिन जीव हत्या और प्रदूषण रुकेगा।
Appeal on Bakrid in madhya pradesh Chandrashekhar Tiwari demands sacrifice of clay goats

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का हवाला

चंद्रशेखर तिवारी ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 का जिक्र किया, जिसमें पशुओं के खिलाफ क्रूरता (जैसे अनावश्यक पीड़ा देना या हत्या) को दंडनीय अपराध माना गया है। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर कुत्ते, बिल्ली, या अन्य पशुओं के खिलाफ क्रूरता पर FIR दर्ज होती है, तो बकरे को क्यों छूट दी जाती है? क्या मुस्लिम समुदाय को पशु हत्या की विशेष छूट है?"

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पशु क्रूरता अधिनियम में धार्मिक बलि को लेकर अस्पष्टता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में जल्लीकट्टू मामले में पशु अधिकारों पर जोर दिया था, लेकिन धार्मिक प्रथाओं को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया। भोपाल के वकील सुनील गुप्ता ने कहा, "पशु बलि पर कानून में छूट है, लेकिन पर्यावरण और पशु कल्याण के लिए प्रतीकात्मक कुर्बानी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।"

मुस्लिम धर्मगुरुओं और समुदाय की प्रतिक्रिया

भोपाल के शहर काजी सय्यद मुश्ताक अली नदवी ने अभी तक इस मांग पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है। हालांकि, कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस अपील को संस्कृति पर हमला करार दिया। मौलाना अब्दुल हाफिज ने कहा, "बकरीद में कुर्बानी इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है। हजरत इब्राहिम की सुन्नत को मिट्टी के बकरों से नहीं बदला जा सकता। यह हमारी धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल है।"

वहीं, प्रगतिशील मुस्लिम संगठनों ने इस मांग पर खुले विचार की बात कही। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रदेश संयोजक शकील अहमद ने कहा, "पर्यावरण और पशु कल्याण के लिए चर्चा हो सकती है। अगर मिट्टी की कुर्बानी से परंपरा और पर्यावरण दोनों का ध्यान रखा जा सकता है, तो इस पर विचार करना चाहिए।"

सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव

  • पर्यावरण प्रदूषण: खून और अपशिष्ट से नदियां और नाले दूषित होते हैं।
  • पानी की बर्बादी: सफाई के लिए लाखों गैलन पानी खर्च होता है।
  • पशु हत्या: पशु क्रूरता बढ़ती है, जो आधुनिक मूल्यों के खिलाफ है।
  • सामाजिक प्रभाव: बच्चों में हिंसा की भावना बढ़ सकती है।
  • पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. रवि शर्मा ने कहा, "बकरीद पर अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। मिट्टी की कुर्बानी से जल प्रदूषण और कचरा कम हो सकता है। नगर निगम को भी सफाई व्यवस्था में राहत मिलेगी।" भोपाल नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में बकरीद के दौरान 500 टन से अधिक जैविक कचरा एकत्र हुआ था।

Bakrid in madhya pradesh mp: संस्कृति बचाओ मंच का इतिहास

संस्कृति बचाओ मंच एक हिंदूवादी संगठन है, जो मध्यप्रदेश में सांस्कृतिक संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करता है। चंद्रशेखर तिवारी इसके संस्थापक और अध्यक्ष हैं, और संगठन ने पहले भी इको-फ्रेंडली होली, दीपावली, और गणेशोत्सव के लिए अभियान चलाए हैं। 2024 में मंच ने प्लास्टिक मुक्त भोपाल अभियान शुरू किया था, जिसे नगर निगम का समर्थन मिला।

कानूनी और संवैधानिक पहलू

भारतीय संविधान की धारा 25 धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देती है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को कुर्बानी का अधिकार है। हालांकि, धारा 51A(g) नागरिकों से पशुओं के प्रति करुणा रखने की अपेक्षा करती है। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में पशु बलि के मामले में कहा था कि धार्मिक प्रथाएं पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के अधीन हैं।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 28 धार्मिक उद्देश्यों के लिए पशु बलि को अपराध से छूट देती है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम कुर्बानी के लिए निर्देश जारी करते हैं, जैसे:

निर्धारित स्थान पर कुर्बानी।

  • अपशिष्ट निपटान के लिए उचित व्यवस्था।
  • सार्वजनिक स्वच्छता का ध्यान।
  • कानूनी विशेषज्ञ सुनील गुप्ता ने कहा, "मिट्टी के बकरों की कुर्बानी कानूनी तौर पर अनिवार्य नहीं की जा सकती, लेकिन जागरूकता अभियान से इसे प्रोत्साहित किया जा सकता है।"
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