Bhopal News AIIMS: दुर्लभ रक्त विकार से पीड़ित महिला को मिला नया जीवन, तिल्ली का लेप्रोस्कोपी से सफल ऑपरेशन
Bhopal AIIMS News: एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रोफेसर डॉक्टर अजय सिंह के नेतृत्व में एम्स भोपाल के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने उन्नत लेप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करके दुर्लभ रक्त विकार से पीड़ित एक महिला की बड़ी तिल्ली को सफलतापूर्वक हटा दिया।
एम्स, भोपाल के हेमेटोलॉजी विभाग में लगभग तीस वर्षीय युवा एक महिला अपने इलाज के लिए आई। शुरूआती जाँच से पता चला कि वह वंशानुगत स्फेरोसाइटोसिस बीमारी से पीड़ित है। इस स्थिति में प्लीहा अथवा तिल्ली, जिसे लाल रक्त कोशिकाओं का कब्रिस्तान भी कहा जाता है, अपने जन्मजात संरचनात्मक दोष के कारण युवा लाल रक्त कोशिकाओं को खत्म कर देता है।

उसे बचपन से ही बार-बार पीलिया और एनीमिया हो रहा था और एनीमिया को ठीक करने के लिए उसे कई बार रक्त चढ़ाने की भी जरूरत पड़ी। मरीज की तिल्ली हटाने के लिए उसे सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में भेजा गया। विभाग के अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ विशाल गुप्ता ने जब उसका मूल्यांकन किया तो उसकी तिल्ली बहुत बढ़ी हुई पाई गयी थी।
यह बड़ी तिल्ली पेट में दर्द और बेचैनी उत्पन्न कर रही थी। "प्रारंभ में हमने इसे पारंपरिक सामान्य ऑपरेशन के द्वारा हटाने के बारे में सोचा। हालाँकि, उसकी कम उम्र और छोटे बच्चों को देखते हुए, हमने मरीज के लाभ के लिए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की योजना बनाई। लैप्रोस्कोपिक प्लीहा हटाना एक तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है और आमतौर पर इसे बहुत बड़ी प्लीहा के साथ विशेष रूप से नहीं अपनाया जाता है" डॉ. विशाल ने कहा।
डॉक्टर विशाल गुप्ता और उनकी टीम ने एनेस्थीसिया की अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. पूजा के साथ मिलकर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। मरीज के पूरी तरह से ठीक होने पर अब उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। एम्स, भोपाल के कार्यपालक निदेशक और सीईओ प्रोफेसर अजय सिंह ने कहा, "हमारा दायित्व समाज के वंचित वर्ग को न्यूनतम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल प्रदान करना है।" उन्होंने चुनौतीपूर्ण मामले का सफलतापूर्वक निस्तारण करने पर गैस्ट्रोसर्जरी टीम को बधाई दी।












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