World Population Day: हर 52 मिनट पर देश में गूंजती है किलकारी, 2030 में होगा 'विस्फोट'

यही तारीख वही थी जिसे संयुक्त राष्ट्र ने हर साल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। 11 जुलाई 1987 से हर साल दुनिया भर में विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाने वाला दिन दुनिया की आबादी के बदलते रूझानों को देखने का ऐतिहासिक मौका भी होता है।
भारत और चीन समेत दुनिया के कई विकासशील और विकसित देश बढ़ती जनसंख्या पर पैनी नज़र रखने लगे हैं। विकासशील देश अपने लोगों की जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों के बीच एक बेहतर कंट्रॉल चाहते हैं। विकास की राह पर आगे बढ़ने की कोशिश में लगे देशों के लिए आबादी का तेजी से बढ़ना आज एक ग्लोबल इश्यू बन चुका है।
एशियाई देशों पर बढ़ रहा बोझ-
आज विश्व भर में एशियाई देश ही दुनिया की ज्यादातर आबादी का बोझ उठा रहे हैं। बढ़ती जनसंख्या से पैदा होने वाले खतरों के बारे में लोगों को जागरुक बनाने की कोशिश में साल का यह खास दिन अपने आप में अद्भुत दिशा देने को प्रेरित करता है। आंकड़ों की मानें तो केवल भारत में हर मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं।
यह संख्या सिर्फ अस्पतालों में पैदा हुए बच्चों की है व कई ऐसे भी आंकड़े हैं जो आधिकारिक तौर पर पुष्ट नहीं हो सके हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारत ने अपनी तेजी से बढ़ रही जनसंख्या की दर कम करने के लिए जल्दी कुछ ठोस कदम नहीं उठाए तो 2030 तक वह विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश कहलाएगा। फिर इस विशाल जनसंख्या को विकास की रफ्तार देना चुनौती होगी।












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