कर्नाटक में हुकूमत से ज्यादा हैसियत का चुनाव

कार्यकर्ताओं से ज्यादा नेताओं वाले राज्य कर्नाटक में तीनों प्रमुख दल कांग्रेस, भाजपा व जनता दल एस के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। राज्य की 28 लोकसभा सीटों में से किसी भी सीट पर मुकाबला सरल नहीं है।
सबसे दिलचस्प मुकाबला चिकबल्लापुर सीट पर दो पूर्व मुख्यमंत्रियों, वीरप्पा मोइली, एचडी कुमारस्वामी के बीच है। मोइली पिछली बार यहां से चुने गए थे, लेकिन इस बा रवह खुद चुनाव लड़ने के स्थान पर अपने बेटे हर्ष मोइली को कांग्रेस से टिकट दिलाना चाहते थे। कांग्रेस उपाध्यक्ष्ज्ञ राहुल गांधी के दबाव में वह जबरन मैदान में हैं।
कुमारस्वामी के यहां आने और मोदी प्रभाव की वजह से भाजपा प्रत्याशी बीएन बच्चेगौड़ा के साथ उनका मुकाबला बेहद पेचीदा हो गया है।
उधर, पूर्व प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों रहे एचडी देवेगौड़ा वोक्कलिगा वोटों के गढ़ हासन सीट से फिर मैदान में हैं। इसी सीट पर सबसे कम रोचक मुकाबला माना जा रहा है।
कांग्रेस से एक और पूर्व मुख्यमंत्री धर्म सिंह बीदर सीट से संसद पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं, बीएस येद्यीयुरप्पा की सियासी साख सबसे ज्यादा दांव पर है। वह पहली बार संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने शिमोगा के मौजूदा सांसद और येद्यियुरप्पा के बेटे बीवाई राधवेंद्र की जगह येद्यियुरप्पा को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है।
राज्य में सबसे ज्यादा 18 प्रतिशत लिंगायत वोटों के समूह के नेता रहे येद्यियुरप्पा को भाजपा में वापसी के बाद इस सीट को बचाने के लिटमस टेस्टे से गुजरना पड़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एस.बंगारप्पा की बेटी और प्रख्यात सिने स्टार शिवराजकुमार की पत्नी गीता शिवराजकुमार को जनता दल एस ने यहां से उतार कर येद्यियुरप्पा को कड़ी चुनौती पेश की है।
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भाजपा से ही दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा के सामने बेंगलूर ग्रामीण सीट कांग्रेस से छीनने की चुनौती है। पिछले लोकसभा चुनाव में एचडी कुमारस्वामी ने यह सीट जीती थी, लेकिन उनके सीट छोड़ने के बाद उपचुनाव में कांग्रेस के उीके सुरेश कुमार ने यह सीट जीत ली थी। उपचुनाव में एक और सीट मंड्या बाजी कन्नड़ फिल्मों की ग्लैमरस स्टार रम्या उर्फ दिव्य स्पंदन ने जीती थी।
इस सीट के लिए कर्नाटक के पूर्व सीएम एसएम कृष्णा ने पूरी ताकत झौंकी है। रम्या की जीत-हार का सीधा असर कृष्णा के खाते में जाएगा। इसी तरह एक अन्य केंद्रीय मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे भी चुनावी रण में हैं, हालांकि उनका जीता बहुत मुश्किल नहीं माना जा रहा है।
सिद्यरमैया की राजनीति भी दांव पर:
कर्नाटक की 28 सीटों में से कांग्रेस के खाते में आने वाली सीटों की संख्या से मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का सियासी भविष्य जोड़ा जा रहा है। जनता दल सेकुलर से कांग्रेस में आए सिद्धरमैया पर राहुल गांधी का वरदहस्त होने से उनके खिलाफ लोग खुलकर नहंी बोल रहे हैं। पिदले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 19 और कांग्रेस को 6 व जद एस को तीन सीटें मिली थीं।
यदि सिद्धरमैया सीटें बढ़ाने में फेल होते हैं, तो उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर खतरा मंडरा सकता है। खड़गे समेत तमाम कांग्रेसी दिग्गज उनका तख्तापलट करने को तैयार बैठे हैं। यही कारण है कि सिद्धरमैया ने इस बार शिद्धत से प्रचार-प्रसार की कमान संभाली है।












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