Chandro Tomar: 65 वर्ष की उम्र में उठाई पिस्तौल, ऐसा रहा Shooter Dadi का सफर

बागपत, अप्रैल 30: 'शूटर दादी' के नाम से मशहूर निशानेबाज चंद्रो तोमर का मेरठ के अस्पताल में निधन हो गया है। उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली 89 साल की निशानेबाज चंद्रो तोमर इसी सप्ताह कोरोना संक्रमित हो गई थी, जिसके बाद उन्हें सांस लेने में परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नेशनल और राज्य लेवल पर शूटर दादी ने निशानेबाजी में कई मेडल जीते थे। शूटर दादी बागपत के जोहड़ी गांव की रहने वाली थीं। चंद्रो तोमर पर फिल्म 'सांड की आंख' बनाई गई है, जिसमें चंद्रो और प्रकाशी का रोल भूमि पेडनेकर औार तापसी पन्नू ने निभाया।

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    'शूटर दादी' चंद्रो तोमर का निधन, कुछ दिन पहले हुई थीं कोरोना संक्रमित
    दादी ने 65 वर्ष की उम्र में उठाई पिस्तौल

    दादी ने 65 वर्ष की उम्र में उठाई पिस्तौल

    65 वर्ष की उम्र में चंद्रो तोमर ने हाथों में पिस्तौल उठाई और दुन‍िया ने 'शूटर दादी' के नाम मशहूर हो गईं। चंद्रो तोमर ने 1999 में पोती शेफाली तोमर ने शूटिंग सीखना शुरू किया था। इसके लिए उसने जौहड़ी राइफल क्लब में एडमिशन लिया। यह क्लब लड़कों का था, इसलिए शेफाली वहां अकेले जाने से डरती थीं। उसे हौसला देने के लिए दादी चंद्रो उसके साथ गईं। वहां पहुंचने पर जब शेफाली पिस्तौल में छर्रे नहीं डाल पाई तो उसे सिखाने के लिए दादी चंद्रो ने उसमें छर्रे डाले, शूटिंग पोजिशन ली और लक्ष्य पर निशाना लगा दिया। उस वक्त उन्होंने एक के बाद दस लक्ष्य भेदे। शूटिंग में उसे 'बुल्सआई' कहते हैं यानी की 'सांड की आंख'।

    जब दादी का न‍िशाना देखकर हर कोई रह गया हैरान

    जब दादी का न‍िशाना देखकर हर कोई रह गया हैरान


    चंद्रो के निशाने को देखकर वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गए। इसके बाद ही कोच ने उन्हें शूटर बनने की सलाह दी। हालांकि, घरवालों की अनुमति न मिलने के डर से दादी चंद्रो इसके लिए राजी नहीं हुईं। फिर बच्चों ने उन्हें शूटर बनने की हिम्मत दी, जिसके बाद दादी चंद्रो तोमर का शूटर दादी बनने का सफर शुरू हुआ। कुछ द‍िनों बाद चंद्रो से प्रेरित होकर उनकी देवरानी प्रकाशी तोमर ने भी शूटिंग की दुनिया में कदम रखने का फैसला किया।

    'शूटर दादी' के नाम से बुलाती है दुन‍िया

    'शूटर दादी' के नाम से बुलाती है दुन‍िया

    बता दें, चंद्रो तोमर और प्रकाशी तोमर को दुन‍िया 'शूटर दादी' के नाम से बुलाती है। इन्‍हीं दोनों की वजह से आटा चक्की के लिए मशहूर जौहड़ी गांव आज शूटिंग के लिए जाना जाता है। गांव में देश के अलग-अलग हिस्से से लोग शूटिंग की ट्रेनिंग लेने आते हैं। चंद्रो तोमर पर फिल्म 'सांड की आंख' बनाई गई है, जिसमें चंद्रो और प्रकाशी का रोल भूमि पेडनेकर औार तापसी पन्नू ने निभाया। इस फिल्म की शूटिंग के लिए भूमि और तापसी ने ना सिर्फ जी-तोड़ मेहनत की बल्कि इन किरदारों में खुद को ढालने के लिए वो कई महीनों तक शूटर दादी के घर में ही रहीं।

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