पंजाब में जली पराली, किसान ने कहा- ये सरकार के वादों की अर्थी जल रही है, जिन्हें वो पूरा नहीं करती
अमृतसर। पंजाब और हरियाणा राज्यों में सरकार के खिलाफ कई महीनों से विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने 3 कृषि कानूनों को पास किया था, जिन्हें किसान संगठनों ने खेती-किसानी के लिए नुकसानदेह बताया। सरकार से रुष्ट किसान न सिर्फ मंत्रियों का विरोध करते हैं, बल्कि सरकारी नियम-कायदों की भी परवाह नहीं कर रहे। पंजाब और हरियाणा में सरकार किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए कह रही है, लेकिन पंजाब में कई क्षेत्रों में किसान बे-धड़क पराली फूंक रहे हैं। आज अमृतसर के जंडियाला गांव में किसानों ने अपने खेतों में पराली जलाई।

किसान ने कहा- वादों की अर्थी जल रही है
जंडियाला गांव में पराली जलते देख पत्रकारों ने जब एक किसान को बताया कि, सरकार ने रोक लगा रखी है। तो उसने कहा कि, "देखो..ये पराली नहीं जल रही बल्कि सरकार के वादों की अर्थी जल रही है।" उसने कहा कि, सरकार को सिर्फ वादे करने होते हैं, लेकिन उसे पूरा नहीं करना होता है। जब वो मनमानी करती है तो नुकसान हमें होता है। वो ऐसे कानून क्यों बनाती है जो अन्नदाता के हित में न हों। यहां हम तो जलाएंगे पराली..।"

पराली जलाने वालों की धर-पकड़
वहीं, पंजाब के कुछ शहरों में वायु-प्रदूषण होने पर पुलिस-प्रशासन ने किसानों को साफ चेतावनी दी है कि खेतों में पराली न जलाएं। इस बारे में दिल्ली की आप सरकार ने पंजाब और हरियाणा की सरकारों पर निशाना साधा, दिल्ली सरकार के आरोप हैं कि इन राज्यों में पराली जलाने के कारण दिल्ली में प्रदूषण बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इस पर कई दफा मुद्दा उठ चुका है, लेकिन सरकारें पराली जलाने की घटनाएं रोकने में नाकाम रही हैं।
केंद्र ने कहा- पराली जलाना प्रदूषण का प्रमुख कारण नहीं
वहीं, आज सुप्रीम कोर्ट में प्रदूषण के मुद्दे पर चली सुनवाई में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि, दिल्ली और उत्तरी राज्यों में वर्तमान में पराली जलाना प्रदूषण का प्रमुख कारण नहीं है, क्योंकि यह प्रदूषण में केवल 10% योगदान देता है। सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई दिल्ली में फैले वायु प्रदूषण को लेकर चली।












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