हरियाणा: गृहमंत्री विज का काफिला घेरने पर किसान प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी, तलवार और लाठियां जब्त
अंबाला। हरियाणा में किसान आंदोलनकारियों का सत्तारूढ़ भाजपा के नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन दिन-ब-दिन तेज होता जा रहा है। बीते रोज अंबाला में गृहमंत्री अनिल विज का काफिला घेर लिया गया। पुलिस ने विज के काफिले पर हमले के आरोप में कुछ प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया। उसके बाद तो किसान संगठन और ज्यादा आक्रोशित हो गए। किसान संगठनों के पदाधिकारियों की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने जीटी रोड जाम कर दिया।

तलवारें और लाठियां बरामद हुईं: डीएसपी
अंबाला कैंट के डीएसपी राम कुमार ने आज कहा, "गृहमंत्री के काफिले पर हमले के आरोप में करीब 50 किसानों को हिरासत में लिया गया। मौके से तलवारें और लाठियां भी बरामद की गईं हैं। दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।"
पुलिस ने मीडिया को तलवारें और लाठियां दिखाई भी हैं। जिसके वीडियो सोशल साइट्स पर चर्चा का विषय बन गए हैं।

यह आंदोलन नहीं, छिपा हुआ एजेंडा: विज
गृहमंत्री विज का कहना है कि, हरियाणा-दिल्ली की सीमाओं पर महीनों से जो चल रहा है, वो किसान आंदोलन नहीं हैं, बल्कि उसकी आड़ में कुछ और चल रहा है। विज ने पिछले दिनों कहा कि, यह आंदोलन 3 कानूनों को लेकर नहीं चल रहा, बल्कि कुछ छिपा हुआ एजेंडा है।" हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने पिछले 6 महीनों से चले आ रहे किसान संगठनों के आंदोलन पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि, किसान नेता कृषि कानूनों में आपत्तियां नहीं बता पा रहे तो आंदोलन किसलिए हो रहा है? विज ने कुछ दिनों पहले कहा था, "ये लोग कहते हैं कि केंद्रीय कृषि मंत्री बात नहीं सुन रहे। जबकि सच ये है कि कृषि मंत्री हमेशा बातचीत के लिए तैयार रहते हैं। वे 11-12 बार मिल भी चुके हैं, लेकिन किसान संगठनों के नेता कानूनों में अपनी आपत्ति नहीं बता पाए। इससे खुद ही यह स्पष्ट हो रहा है कि वे स्वार्थ पूर्ति कर रहे हैं।"

इधर, टिकैत बोले- आंदोलन चलता रहेगा
वहीं, भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत लगातार भाजपा सरकार पर हमलावर हैं। टिकैत ने सरकार को एक बार फिर कृषि कानूनों को वापस लेने को कहा है। साथ ही उन्होंने कहा है कि, यदि सरकार किसानों की हितैषी है तो एमएसपी पर कानून बनाए। उन्होंने कहा कि, सरकार किसानों की ताकत को समझे। अगर किसान की अनदेखी होगी तो किसान सबक भी सिखाना जानता है। उन्होंने ये भी कहा कि आंदोलन को खत्म करने का कोई सवाल ही नहीं है, आंदोलन चलता रहेगा।
आखिर क्यों हो रहा कृषि कानूनों का विरोध?
केंद्र सरकार बीते साल जून में तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान हैं। इसको लेकर किसान संगठनों ने बिल पर ऐतराज जताया। सितबंर में किसान संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी। उसके बाद 26 नवंबर को पंजाब-हरियाणा के किसान आंदोलनकारियों ने दिल्ली के लिए कूच किया। तभी से वे लगातार आंदोलनरत हैं और कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी दिल्ली-हरियाणा के सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर एवं यूपी और दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर समेत दिल्ली के अन्य बॉर्डर्स पर धरना दे रहे हैं।












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