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कौन है असली किन्नर और कौन नकली? अब हाईकोर्ट करेगा फैसला, दाखिल हुई याचिका

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इलाहाबाद/प्रयागराज। प्रयागराज के कुंभ मेले के दौरान अस्तित्व में आये किन्नर अखाड़े के बाद अब किन्नरों के उत्थान की दिशा में परिवर्तन होने वाला है। नकली किन्नर बनकर लोगों को परेशान करने व धन उगाही करने के वाक्यों पर रोकथाम लगाने के लिये मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। कौन असली किन्नर है और कौन नकली इसकी पहचान के लिये उच्चस्तरीय मेडिकल टेस्ट जैसी व्यवस्था को लागू करने की मांग की गयी है। इसके लिये इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गयी है। जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और अब इस पर सुनवाई होगी।

कई बहुरूपिये किन्नर बन गए

कई बहुरूपिये किन्नर बन गए

इस याचिका में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने भी हलफनामा देते हुये कहा है कि बहुत से धूर्त व बहुरूपिये किन्नरों के वेश में किन्नरों के बीच शामिल हो गए हैं। वह व्यक्तिगत लाभ व अपने उद्देश्ययों को पूरा करने के लिये ऐसा कर रहे हैं। ऐसे में यह बहुत आवश्यक है कि मेडिकल टेस्ट के माध्यम से असली व नकली किन्नरों की पहचान की जाये। और, असली किन्नरों को संरक्षण, उनका हक व आरक्षण दिया जाये।

किन्नरों के उत्थान का प्रयास

किन्नरों के उत्थान का प्रयास

इलाहाबाद हाईकोर्ट में किन्नरों के हित के लिये दाखिल याचिका पर सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पंकज भाटिया की डबल बेंच ने शुरू कर दी है। और, राज्य सरकार, भारत सरकार समेत किन्नर अखाड़ा आदि को नोटिस जारी कर इस बारे में उनका पक्ष जानना चाहा है। मामले में संभावना है कि किन्नरों को संरक्षण व सुविधा देने के लिये मेडिकल टेस्ट व इनका डाटाबेस सरकार अपने पास रख सकती है। गौरतलब है कि बीते दिनों ट्रेन से लेकर अन्य स्थानों पर इनके लिये सुविधाओं का क्रम शुरू हुआ है। धार्मिक रूप से किन्नर अखाड़ा बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर इनकी पहचान के लिये व इनकी आवाज उठाने की दिशा में अब आमूलचूल परिवर्तन हो रहा है।

छवि खराब करने की शिकायत

छवि खराब करने की शिकायत

इलाहाबाद हाईकोर्ट में किन्नर के उत्थान के लिये दाखिल याचिका में सबसे बड़ा आधार किन्नरों की छवि का है। याचिका में बताया गया है कि नकली किन्नर बनकर बड़े पैमाने पर लोग धन उगाही में जुटे हुये हैं और किन्नरों की छवि को धूमिल कर रहे हैं। बच्चों के जन्म पर, शादी विवाह आदि मौकों से लेकर पार्क, दुकान, ट्रेन, चौराहा व सार्वजनिक स्थलों पर लोगों से गुंडा टैक्स वसूलते हैं। इससे असली किन्नरों की छवि खराब हो रही है। याचिका में बताया गया है कि लोगों को डरा धमका कर एक धंधा चलाया जा रहा है। इसे बंद करने के लिये यह बहुत आवश्यक है कि असली-नकली किन्नरों की पहचान हो। सरकार इसके लिये एक उच्चस्तरीय मेडिकल जांच कराये। जिससे नकली किन्नरों पर रोकथाम लग सके और असली किन्नरों को उनका हक, संरक्षण मिल सके। याचिका में किन्नरों को आरक्षण दिये जाने को लेकर भी अपील की गयी है।

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English summary
PIL filed in the allahabad highcourt to identify real transgender
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