• search
अहमदाबाद न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

भारत की पहली बुलेट ट्रेन के सामने मैंग्रोव बाधा, इन खास पेड़ों की कटाई के लिए हाईकोर्ट से लेनी होगी मंजूरी

|

अहमदाबाद। मुंबई से अहमदाबाद रूट पर भारत के पहले बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मैंग्रोव वनों की वजह से अटक गया है। ट्रेन की लाइन के लिए यहां खड़े पेड़ों की कटाई करने के लिए सरकार से रेलवे प्रशासन को मंजूरी तो मिली है, मगर अभी बॉम्बे हाइकोर्ट से मंजूरी मिलना बाकी है। अगस्त महीने में बॉम्बे हाइकोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा। बता दें कि, बुलेट ट्रेन परियोजना करीब 98,000 करोड़ रुपए की लागत से परवान चढ़ेगी। इस परियोजना के लिए महाराष्ट्र के समुद्र तटीय क्षेत्रों एवं झीलों में खड़े खास वनों की बलि चढ़ानी होगी। ये वन हैं मैंग्रोव पेड़ों और झाड़ियों के। यदि बुलेट ट्रेन का रूट निकालने के लिए इन पेड़ों की कटाई कराई जाती है तो पर्यावरण मंत्रालय और हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट एतराज जताएंगे।

बॉम्बे हाईकोर्ट को इसलिए है बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर एतराज

बॉम्बे हाईकोर्ट को इसलिए है बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर एतराज

महाराष्ट्र तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि उसे मैंग्रोव काटने की अनुमति मिल गई है। मुंबई, ठाणे और पालगर जिलों में, केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति को मंजूरी दी गई है। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि इसे मंजूर करने से पहले पर्यावरण विशेषज्ञों की दलीलें सुनना जरूरी है। मुख्य न्यायाधीश नंदराजोग ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार यदि परियोजना को सार्वजनिक हित के लिए अनुमति दी जाती है, तो यह देखा जाना चाहिए कि यह पर्यावरण को कैसे प्रभावित करता है। अदालत ने कहा कि एनजीओ बॉम्बे एनवायरनमेंट एक्शन ग्रुप को इस मामले में एक पार्टी बनानी चाहिए और अगस्त के महीने में सुनवाई की तैयारी करनी चाहिए।

किसानों से भी पड़ रहा लड़ना

किसानों से भी पड़ रहा लड़ना

बुलेट ट्रेन परियोजना के जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों और भूस्वामियों द्वारा गुजरात और महाराष्ट्र में बहुत से केस दर्ज कराए गए हैं। जहां इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का काम चल रहा है, वहीं तटीय मैंग्रोव के लिए मंजूरी का मुद्दा सामने आया है। गुजरात में इस परियोजना के लिए बुलेट ट्रेन के रूट में बहुत से पेड़ काटे जा रहे हैं। बता दें कि, बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए, मार्ग का पांचवा हिस्सा पालधर जिले से होकर गुजरता है। भूमि अधिग्रहण यहां एक बड़ा मुद्दा है। बुलेट ट्रेन के रास्ते में, छोटे पैमाने पर 800 संरचनाएं हैं जिन्हें ध्वस्त कर दिया जाएगा। ठाणे और पालधर जिलों में, 55 और 62 हेक्टेयर भूमि जंगल में स्थित हैं। महाराष्ट्र में, 18.92 हेक्टेयर भूमि में, 1.55 लाख से ज्यादा मैंग्रोव को हटाने की बात पर जोर दिया गया है और इसे काटने की अनुमति दी गई है।

508 किलोमीटर लंबी लाइन पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

508 किलोमीटर लंबी लाइन पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

508 किलोमीटर लंबी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को कम करेगी। वर्तमान में, अहमदाबाद से मुंबई तक छह से आठ घंटे का समय लगता है, लेकिन ऐसा दावा किया गया है कि, बुलेट ट्रेन ढाई घंटे में मुंबई पहुंचा जा सकती है। यह ट्रेन मुंबई, ठाणे, विरार, वापी, बोईसर, भरूच, बिलिमोरा, सूरत, वडोदरा, आनंद और अहमदाबाद समेत 12 स्टेशनों को कवर करेगी। केंद्र सरकार 2023 तक इस हाई स्पीड ट्रेन को शुरू करने की योजना बना रही है।

प्राजेक्ट का ज्यादातर दायरा महाराष्ट्र में

प्राजेक्ट का ज्यादातर दायरा महाराष्ट्र में

बुलेट ट्रेन को महाराष्ट्र में चार स्थानों पर खड़ा किया जाना है, लेकिन 155.64 किलोमीटर मार्ग महाराष्ट्र के क्षेत्रों में आता है। इस मार्ग पर एक पुल और 16.91 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। जिनमें से एक ठाणे की खाड़ी से गुजरने वाली 20.71 किलोमीटर लंबी सुरंग है।

यह भी पढ़ें: नहीं होगी तबाही, अब गुजरात में भारी बारिश कराते हुए निकल जाएगा "वायु", तेज रफ्तार से पाकिस्तान की ओर मुड़ा

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Indian bullet train project: Now, Bombay HC to hear experts before deciding on cutting mangroves
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X