गुजरात: 2 हजार से ज्यादा रेजिडेंट डॉक्टर हड़ताल पर, डिप्टी CM की चेतावनी के बावजूद छठे दिन भी धरना
अहमदाबाद। गुजरात के विभिन्न जिलों के 2,000 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाने के लिए हड़ताल कर रहे हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि, राज्य सरकार द्वारा कोरोना महामारी के दौरान लागू किया गया आदेश रद्द नहीं किया जाए, जिसमें 1:2 के अनुपात की मेडिकल ड्यूटी का प्रावधान था। डॉक्टरों की मांग है कि, उनकी 1 दिन की ड्यूटी को 2 दिन की ड्यूटी के बराबर गिना जाए। साथ ही वेतन में कोई गड़बड़ी न होने दी जाए। डॉक्टरों की इस हड़ताल को बीजे मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल में आज 6वां दिन है। वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

रेजिडेंट डॉक्टर 4 अगस्त से हड़ताल पर
अहमदाबाद, राजकोट, भावनगर, सूरत, वडोदरा आदि जिलों से जुटे रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि, वे अपने हक की खातिर हड़ताल जारी रखेंगे। यही वजह है कि, बीजे मेडिकल कॉलेज एवं अहमदाबाद सिविल अस्पताल में प्रदर्शनकारियों के समूहों द्वारा हड़ताल की घोषणा के बाद से कामकाज बाधित हो रहा है। बीते रोज यानी कि, हड़ताल के पांचवें दिन डॉक्टरों ने रक्तदान शिविर लगाया। जिसमें बहुत से डॉक्टरों ने रक्तदान किया। इस दौरान उन्होंने कहा, 'अगर दोपहर तक मांग पूरी नहीं हुई तो हम सरकार को कोरोना वॉरियर्स का सर्टिफिकेट लौटा देंगे।

डॉक्टरों ने कहा- ये हैं हमारी समस्याएं
खालिद नाम के डॉक्टर ने कहा कि, राज्य सरकार हमारे साथ अच्छा बर्ताव नहीं कर रही। हमारी मांग हैं कि, सातवाँ वेतन आयोग जो उसका लाभ दिया जाए। ड्यूटी को 1:2 अनुपात वाले रूल्स में काउंट किया जाए। जो नियुक्तियां रुकी हैं, उन्हें चालू कराया जाए। वहीं, कई अन्य डॉक्टरों ने कहा कि, वे बांड के मुद्दे पर सरकार से खफा हैं। दरअसल, कुछ समय पहले स्वास्थ्य आयुक्त ने स्नातकोत्तर अध्ययन की अवधि 3 महीने बढ़ाई। एमडी, एमएस और डिप्लोमा डॉक्टर के बैचों की अवधि भी 3 महीने बढ़ा दी गई, और एक परिपत्र जारी कर कहा कि बांड की अवधि 1.2 रहेगी। जिसमें 1 महीने की ड्यूटी 2 महीने के बांड के रूप में काउंट होगी। मगर, अब सरकार अपने वादे से मुकर गई है। जब हम जवाब मांग रहे हैं तो खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है। इसी वजह से जूनियर डॉक्टरों में भी खासा नाराजगी है। राज्यभर में हजारों डॉक्टर हड़ताल पर हैं।

उपमुख्यमंत्री पटेल की चेतावनी दरकिनार
प्रदर्शन एवं हड़ताल को देखते हुए कुछ ही दिनों पहले उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा था कि, व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने हड़ताली डॉक्टरों को हड़ताल जारी रखने पर उनके खिलाफ "सख्त कार्रवाई" कराने की चेतावनी दी। इसके एक दिन बाद, जामनगर और वडोदरा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डीन ने हड़ताली डॉक्टरों के खिलाफ उनके छात्रावासों तक पहुंच को कम करके कार्रवाई शुरू कर दी। वहीं, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने सूरत में एक कार्यक्रम के इतर मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए दोहराया कि बंधुआ डॉक्टरों की मांग "वैध नहीं" है।

मुख्यमंत्री बोले- इन डॉक्टरों की मांग वैध नहीं
मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा, "डिप्टी सीएम यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अब कोरोनाकाल नहीं है। अस्पतालों में कोरोना के कोई केसेस नहीं बचे। ऐसा कोई डॉक्टर भी ड्यूटी पर नहीं हैं, ऐसे में बांड को निष्पादित नहीं करने की मांग मान्य नहीं है।"

प्रदर्शनकारियों ने कहा- हमारी बिजली गुल
हड़ताल पर बैठे एक डॉक्टर ने कहा, 'कॉलेज प्रशासन दबाव में है, क्योंकि हमें पता चला है कि एक मंत्री कल जीजी अस्पताल का दौरा कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने कुछ हड़ताली डॉक्टरों के कमरों की बिजली आपूर्ति काट दी है।" दूसरे डॉक्टर ने कहा, 'सरकार को झुकना होगा, क्योंकि 2000 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं, वहीं सिविल अस्पताल के डॉक्टर भी 5 दिनों से हड़ताल पर हैं।"












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