कोरोना की चपेट में आई 21 साल की नियोमी शाह की 32 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी, बोली- डॉक्टर सुपर हीरो हैं
अहमदाबाद। गुजरात में कोरोना वायरस की चपेट में आई 21 साल की नियोमी शाह अब ठीक हो गई है। नियोमी अहमदाबाद में पॉजिटिव पाई गई पहली कोरोना मरीज थी। उसका एक महीने इलाज चला। उसे 32 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी मिली है। उनका केस डॉक्टर्स के लिए बहुत ही रेयर था, क्योंकि कोरोना मरीज सामान्यत: 15 दिन में ठीक हो जाते हैं। नियोमी के अस्पताल में भर्ती होने के उपरांत बहुत से कोरोना मरीज वहां भर्ती हुए थे और उन्हें छुट्टी भी मिलती गई। लेकिन नियोमी की अस्पताल में रहने की अवधि बढ़ती ही गई। ऐसा इसलिए क्योंकि उसकी कोरोना जांच रिपोर्ट लगातार पॉजिटिव आ रही थी, लेकिन संक्रमण के कोई भी लक्षण स्पष्ट नहीं दिखते थे।

अहमदाबाद की पहली मरीज 21 साल की नियोमी बोली-
खुद नियोमी शाह ने बताया कि, उसके बाद जब बीते शुक्रवार को मेरी रिपोर्ट निगेटिव आई तो मुझे अस्पताल से छुट्टी मिली। अहमदाबाद के एसवीपी अस्पताल में वे डॉक्टर्स और स्टाफ सुपर हीरो हैं, जो हर वक्त मेरे लिए तैनात रहे। वो मुझसे कहते थे- धीरज रखो। मेरी काउंसिलिंग भी करते थे।बहरहाल, भले ही मुझे छुट्टी मिल गई है, लेकिन अगले 14 दिन मुझे अपना बहुत ख्याल रखना है। 32 दिन बाद मैंने घर का खाना खाया, इसकी मुझे खुशी है। मैं अभी न तो बाहर निकलूंगी और न ही किसी से मिलूंगी।''

'वो जो लोग इग्नोर कर रहे हैं, बिल्कुल लापरवाही न करें'
नियोमी ने आगे कहा- ''जो फिजूल में बाहर निकलते हैं उनसे मुझे कहना है कि मैं एक महीने से ज्यादा वक्त तक हॉस्पिटल में रही। और, अभी भी मुझे 14 दिन घर पर ही रहकर अपना ध्यान रखना है। मेरे लिए हर दिन नए चैलेंज की तरह होता था। मुझे पता था कि मेरी हेल्थ अब बहुत कमजोर है, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी। घर में आप लोग सुरक्षित रहकर बहुत कुछ करने में समर्थ और स्वतंत्र रहेंगे हैं, इसलिए लापरवाही न करें।''

2 साल की बच्ची ने भी कोरोना से जीती जंग
वहीं, इससे पहले अहमदाबाद में 2 साल की बच्ची भी कोरोना से मुक्त हुई थी। वह बच्ची इसी माह भर्ती कराई गई थी। उसके पिता वटवा में रहने वाले आरिफ मंसूरी नामक शख्स हैं। आरिफ मंसूरी का कहना है कि, जब बेटी को बुखार आया, तब मैं उसे अस्पताल लेकर गया था। जहां उसमें कोरोना के लक्षण मिले। सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे एसवीपी अस्पताल में भर्ती कराया। मंसूर ने कहा, मेरी बेटी को 8 दिन पहले उस अस्पताल में भर्ती किया गया था। उस समय उसकी मां गर्भवती थी। ऐसे में हॉस्पिटल में मुझे ही उसके साथ रखा गया। वहां डॉक्टर्स ही बेटी के लिए फरिश्ते थे, जिन्होंने उसे बचाया।'












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