• search
आगरा न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

यहां कैद होकर पढ़ते हैं बच्चे, शिक्षकों को पड़ोसी लेकर आते हैं स्कूल

|

आगरा। देश मे सर्व शिक्षा अभियान और बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के नारे आपको रोज ही सुनाई और दिखाई देते हैं। कई जगहों पर परिजन या क्षेत्रीय दबंग या फिर आलसी शिक्षकों के नौनिहालों की पढ़ाई बंद कराने के मामले भी सामने आ जाते हैं, लेकिन ताजनगरी आगरा के एक स्कूल में बच्चों की कमी और शिक्षकों में दहशत का एक अनोखा मामला सामने आया है।

terror of monkey attack student and teachers force to go to school in agra

जालियों के अंदर कैद में पढ़ते हैं बच्चे

यहां स्कूल में बच्चे जल्दी पढ़ने नहीं आते हैं और जो आते हैं उन्हें खुद शिक्षक घर से लेकर आते हैं और कमरे में जालियों के अंदर कैद कर पढ़ाते हैं। यही नहीं यहां शिक्षक भी जब आते हैं तो उन्हें मोहल्ले के लोग स्कूल तक छोड़ने आते हैं। ऐसा इस स्कूल की जर्जर इमारत और यहां बंदरों के आतंक के चलते हो रहा है।

स्कूल की हालत जर्जर, बंदरों का आतंक

आगरा के माइथान क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय की हालत जर्जर है और यहां बंदरों का जबरदस्त आतंक है। इस आतंक की वजह से शासन द्वारा दी गई मदद से प्रधानाचार्य ने यहां जालियां लगवा दी हैं और बच्चों को अंदर बंद करवा कर पढ़ाई करवाती हैं। उनके अनुसार, बंदरों का डर होने के कारण ऐसा करना पड़ता है। यहां अब 53 बच्चे हैं लेकिन अधिकांश नहीं आते क्योंकि उनके परिजनों को यहां भेजने से डर लगता है। मामले को संज्ञान में लेते हुए एडीएम सिटी केपी सिंह ने विद्यालय की व्यवस्थाएं सुधरवाने की बात कही है।

ये भी पढ़ें: प्रेमी के साथ दिखी पत्नी तो हाथ-पैर बांधकर पीटा, पंचायत के फरमान पर दिया तीन तलाक

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
terror of monkey attack student and teachers force to go to school in agra
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more