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Agra: जिस नवजात को मृत बताकर परिजनों को सौंपा, उसने 12 घंटे बाद अंतिम संस्कार के समय खोल लीं आँखे

जिस नवजात बच्चे को डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, 12 घंटे बाद अंतिम संस्कार के समय उस बच्चे ने सांस ली और आंखे खोल ली। लेकिन जब दोबारा नवजात को अस्पताल लेकर पहुंचे, तो उसे डॉक्टरों ने फिर मृत घोषित कर दिया।

Agra newborn who was declared dead after delivery opened his eyes after 12 hours during last rites

ताजनगरी आगरा से डॉक्टरों की लापरवाही का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। महिला की डिलीवरी के बाद जिस नवजात को डॉक्टर ने मृत बताकर परिजनों को सौंप दिया, उसकी 12 घंटे बाद धड़कन चल रही थी। जल प्रवाह करते समय नवजात ने आंखें खोली तो परिजन उसे अस्पताल लेकर भागे। चिकित्सक ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया, लेकिन वहां पर उसे फिर से मृत घोषित कर दिया गया। अब परिजन सीएचसी पर प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं।

Agra newborn who was declared dead after delivery opened his eyes after 12 hours during last rites

नवजात को बताया मृत, रात भर कपड़े में लिपटा रखा रहा बच्चा
बता दें कि आगरा के जैतपुर थाना अंतर्गत पारना गांव निवासी चंदन सिंह की पत्नी मीरा देवी को गुरुवार रात प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने रात 10 बजे मीरा देवी को जैतपुर सीएचसी में भर्ती कराया। जहां रात 10.30 बजे प्रसव हुआ। परिजनों के मुताबिक, नवजात को नर्सिंग स्टाफ ने मृत बताकर कपड़े में लपेटकर सौंप दिया। इसके बाद रात में मीरा को घबराहट और बेचैनी होने पर उनका उपचार किया। हालत ठीक होने पर उनको भी घर भेज दिया। इस दौरान रात भर नवजात कपड़े में लिपटा रखा रहा।

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शरीर में हलचल के साथ बच्चे ने आंखें खोली
जिसके बाद शुक्रवार की सुबह 10 बजे अंतिम संस्कार के लिए नवजात को नहलाया तो उसकी सांसे चल रही थी। शरीर में हलचल के साथ उसने आंखें खोली। नवजात को जिंदा पाकर आनन्-फानन में परिजन उसे गांव के नजदीक पड़ने वाले सिरसागंज में डॉक्टर के पास ले पहुंचे। नवजात की हालत चिंताजनक बताकर डॉक्टर ने हायर सेंटर भेज दिया। उसने कहा कि बच्चे को तत्काल वैंटिलेटर की जरूरत है। वो बच्चे को आगरा शहर के एक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां पर डॉक्टरों ने उसे फिर से मृत घोषित कर दिया।

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    समय पर इलाज मिल जाता तो जान बच जाती
    चंदन सिंह ने बताया कि प्रसव में लापरवाही बरती गई है। नवजात को ठीक से देखा होता और उसे समय पर इलाज मिल जाता तो जान बच सकती थी। डॉक्टर ने बच्चे की सही से सफाई तक नहीं की। प्रसव के 12 घंटे बाद नवजात की सांस चलती मिली। उन्होंने दोषियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है। वहीं इस संबंध में जैतपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. विनय कुमार ने बताया कि नवजात के जल प्रवाह के समय जिंदा होने के बारे में सुना है, शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई होगी। नवजात को परिजन शिकोहाबाद और आगरा में कहां ले गये, जानकारी जुटाई जाएगी। तभी कुछ स्पष्ट हो सकेगा।

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    5 बेटियों के बाद हुआ था बेटा
    चन्दन और मीरा देवी की यह छठवीं संतान थी। इससे पहले उनकी पांच बेटियां हो चुकी थी। तुलसी (15), प्रिया (11), दक्षिता (8), साक्षी (5), प्रियांसी (3) के बाद बेटा पैदा हुआ था। घरवालों का कहना है कि नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही ने उनके बेटे को उनसे छीन लिया। पिता चंदन सिंह और प्रसूता मीरा देवी ने बताया कि उन्होंने बेटे के लिए मन्नतें मांग रखी थी। मंदिरों में जाकर प्रार्थनाएं की थी।

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