भारत को मैंने अपनी पसंद का पाया : तस्लीमा

नई दिल्ली| बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कहा कि वह खुद को दुनिया की नागरिक मानती हैं और भारत, खास तौर से पश्चिम बंगाल से मुहब्बत करती हैं। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि लोगों को अपने निवास की जगह चुनने की आजादी मिलनी चाहिए।

India the only place I identify with: Taslima Nasreen

भारतीय महिला प्रेस कॉर्प में यहां शुक्रवार को महिला पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में तस्लीमा ने कहा कि वे भारत सरकार की शुक्रगुजार हैं कि 1994 में अपने देश से खदेड़े जाने के बाद उन्हें भारत में रहने दिया और बाद चलकर उन्हें 2011 से दिल्ली में भयमुक्त निवास की अनुमति दी।

तस्लीमा ने 1993 में 'लज्जा' जैसी विवादास्पद पुस्तक लिखकर बांग्लादेश के कट्टरपंथी लोगों की नाराजगी मोल ली। उनकी किताब पर बांग्लादेश में प्रतिबंध लगा दिया गया और उनके खिलाफ मौत का 'फतवा' जारी किया गया।

उन्होंने कहा कि वह स्वीडन की नागरिक हैं और अमेरिका का ग्रीन कार्ड भी है, लेकिन उन्होंने भारत में रहना पसंद किया 'क्योंकि भारत ही वह अकेली जगह है जहां मैं अपनी पहचान के साथ जी सकती हूं।'

तस्लीमा ने कहा, "मैं दुनिया की नागरिक हूं।" उन्होंने आगे कहा कि लोगों को उनकी पसंद की जगह पर रहने की आजादी मिलनी चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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