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संसद ने पलटा सुप्रीम कोर्ट का फैसला, अब जेल से नेता लड़ सकेंगे चुनाव

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नयी दिल्ली। भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। संसद ने देश की सर्वोच्य अदालत का फैसला बदल दिया है। लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए अपराधिक छवि वाले नेताओं को चुनाव लड़ने का अधिकार दे दिया है। लोकसभा की मुहर के साथ ही संसद ने शुक्रवार देर रात भारतीय जन प्रतिनिधित्व (संशोधन) विधेयक 2013 को पारित कर दिया। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय के जेल में कैद या पुलिस हिरासत से नेताओं के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने वाले फैसले को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से लाया गया है।

लोकसभा में इस विधेयक के पास होने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट का वो फैसला निष्किय हो जाएगा, जिसमें उसने अपराधिक छवि वाले नेता जो जेल में कैद या फिर पुलिस की हिरासत में है उनके चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाई थी।

Parliament passes bill to allow those in jail to contest polls.

सरकार इस विधेयक को राज्सभा ने 28 अगस्त को ही पारित कर दिया था। संसद का सत्र शुरू होने के साथ ही सभी पार्टियों ने एक सुर से सरकार से शीर्ष अदालत के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए विधेयक लाने की मांग की थी।

पार्टियों को इस बात का डर था कि शीर्ष अदालत के फैसले की आड़ में चुनाव के मौके पर झूठे मुकदमे का सहारा लेकर विरोधी किसी प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा सकते हैं। यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय के 10 जुलाई के उस फैसले को निष्प्रभावी करेगा जिसमें अदालत ने कहा था कि जो लोग जेल में बंद हैं वे चुनाव संबंधी कानून के मुताबिक मतदान में हिस्सा नहीं ले सकते इसलिए वे संसद या राज्य विधानसभाओं का चुनाव भी लड़ने के योग्य नहीं हैं।

कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने यह विधेयक पेश किया। उन्होंने सदन से कहा, "कई बार हम चूक करते हैं और कई बार अदालतें चूक जाती हैं। इस मामले में अदालत ने चूक की है और आज हम उसे दुरुस्त कर रहे हैं।"

सिब्बल ने इससे पहले कहा था कि देश में एक आम 'नकारात्मक धारणा' बन गई है कि नेता अपराधी होते हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य कीर्ति आजाद और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्य दारा सिंह चौहान ने कहा कि कई बार नेता सामाजिक मुद्दों को लेकर आंदोलन में हिस्सा लेते हुए जेल जाते हैं और ऐसी गिरफ्तारी को आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के समतुल्य नहीं माना जा सकता।

सरकार ने शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका दायर की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद संशोधन विधेयक पेश किया।

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English summary
Negating a Supreme Court order, Parliament passed a bill that maintains the right of those in jail to contest polls.
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