लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की पहल
लखनऊ। नवाबों के शहर लखनऊ में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा के लिए समाज के विभिन्न समुदायों ने कमर कस ली है। ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा के लिए मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने आंदोलन चलाने की घोषणा की है।
ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने 'जर्जर व ढहती हुई ऐतिहासिक धरोहरों व गंगा जमुनी तहजीब की हिफाजत और हमारी जिम्मेदारियां' विषय पर लखनऊ प्रेस क्लब में मंगलवार को परिचर्चा का आयोजन किया था जिसमें समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों ने हिस्सा लिया।
लखनऊ के मशहूर इमामबाड़ा के बारे में नवाब मीर अब्दुल्ला जाफर ने बताया कि इसका निर्माण 1784 में कराया गया था। उस समय निर्माण पर एक करोड़ रुपए का खर्च आया था। देखरेख के अभाव में आज यह जर्जर होता जा रहा है।

ऐतिहासिक इमारतें
पारख महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व राज्य मंत्री कौशल किशोर ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत व देखभाल की जानी चाहिए और लखनऊ में गंगा-जमुनी तहजीब फिर से शुरू की जानी चाहिए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड गंभीर
ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा कि लखनऊ की गंगा-जमुना तहजीब की हिफाजत के लिए ऐतिहासिक धरोहरों की हिफाजत जरूरी है। इसके लिए ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड आंदोलन चलाएगा और सरकार को ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित रखने के लिए बाध्य करेगा।

क्या कहते हैं पूर्व छात्र
शिया डिग्री कालेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष मजहर अब्बास रिजवी ने कहा कि सभी रूमी गेट व इमामबाड़ा धीरे-धीरे अपना अस्तित्व खो रहे हैं।

फिक्स डिपॉजिट का सवाल
रिजवी ने हुसैनाबाद ट्रस्ट की करोड़ों की संपत्ति, इमामबाड़ा की रोजाना होने वाली आय के खर्च और हुसैनाबाद ट्रस्ट के पास पड़ी सात करोड़ रुपये की फिक्स डिपॉजिट का सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों की हिफाजत के लिए छात्र भी संघर्ष करेंगे।

तमाम लोग आये साथ
लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों व गंगा-जमुना तहजीब को बचाने के लिए सैय्यद मासूम रजा, गायत्री परिवार के जे. पी. सिंह, मृदुला राय, दिनेश राय, रवि कपूर जी, हरिश्चंद्र धानुक (ताजिया सेवक), लाडली रिजवी, सुफिया खान ने अपने विचार रखा और इसके लिए आंदोलन में लगातार शिरकत करने का ऐलान किया।












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