खाद्य सुरक्षा बिल पर जयललिता ने पकड़ी मोदी की राह
चेन्नई। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने भी खाद्य सुरक्षा बिल का विरोध किया है, जिसकी पहले से ही उम्मीद की जा रही है। हालांकि इसका कारण बताते हुए जयललिता ने कहा है कि केंद्र सरकार ने हमारे द्वारा सुझाए गये संशोधनों को शामिल नहीं किया है। यह बिल राज्य के लिए अधिक लाभप्रद नहीं है और मौजूदा परिस्थितियों में यह बिल स्वीकार ही नहीं किया जा सकता है। बताया जाता है कि जयललिता ने संपूर्ण शहरी आबादी को विधेयक के दायरे में लाने की बात कही थी लेकिन सरकार ने उनकी कई मांगों को नहीं माना।
जयललिता ने यह भी मांग रखी थी कि केंद्र सरकार को कीमतें तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे तमिलनाडु जैसे राज्यों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका कहना था कि सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आवंटन में कटौती नहीं करने को तो तैयार है लेकिन सम्पूर्ण शहरी आबादी को भी इस दायरे में नहीं लाना चाहती है, अगर सभी को इस दायरे में नहीं लाया जा सकता है तो कम से कम 75 फीसदी आबादी को इसमें जरूर शामिल किया जाये।

जयललिता ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में केंद्र सरकार के कीमत तय करने संबंध में आपत्ति भी जताई है कहा है कि चावल की कीमत उसके आर्थिक मूल्य के आधार पर तय करने से तमिलनाडु सरकार पर 1,000 करोड़ रूपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। वहीं राजनीति विशेषज्ञ बताते हैं कि जयललिता ने 2014 में भाजपा का समर्थन करने के लिए पहले ही कह दिया था अत: वह इस बिल के खिलाफ हैं। इसके अलावा मोदी ने भी आंध्र प्रदेश में दिये गये अपने भाषण में तमिलनाडु सरकार की प्रशंसा की थी।












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