सोनिया जी, दुर्गा मामले में तो बोल दीं पर खेमका पर खामोश क्यों थी: आप
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। आम आदमी पार्टी (एएपी) ने, उत्तर प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सोनिया गांधी की ओर से लिखे गए पत्र के संदर्भ में सवाल खड़े किए हैं कि आखिर दामाद रॉबर्ट वाड्रा की भ्रष्टाचार में कथित संलिप्तता को उजागर करने वाले हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के मामले में वह क्यों चुप थीं? खेमका ने हरियाणा में डीएलएफ तथा वाड्रा के बीच हुए भूमि सौदे को रद्द कर दिया था, जिसके बाद अक्टूबर 2012 में उन्हें हरियाणा में चकबंदी महानिदेशक के पद से हटा दिया गया था।
एएपी ने बयान जारी कर कहा है, "सोनिया उस वक्त चुप थीं, जब एक अन्य बहादुर व ईमानदार अधिकारी इसी तरह के अत्याचार का शिकार हुआ था। कांग्रेस शासित राज्यों में अन्य ईमानदार व बहादुर अधिकारियों के साथ भी यही बर्ताव हुआ है। संजीव चतुर्वेदी भी उन्हीं में से एक हैं, जो वन क्षेत्र में अतिक्रमण करने वाले माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए अत्याचार का शिकार हुए।" बयान में कहा गया है, "यदि कांग्रेस या भाजपा उन ईमानदान अधिकारियों की हिफाजत करने को लेकर गंभीर होते, जो अपने राजनीतिक अधिकारियों के अवैध आदेशों को मानने से इंकार कर देते हैं, तो फिर वे गंभीर लोक सेवा सुधार और पुलिस सुधार को आगे बढ़ाए होते, ताकि इस तरह के अधिकारी अपने राजनीतिक आकाओं के चंगुल से मुक्त हो जाते।"

कौन हैं अशोक खमेका?
हरियाणा सरकार पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाले अशोक खेमका, 1991 बैच के आईएस अधिकारी हैं। 21 साल की नौकरी में 40 बार उनका तबादला हो चुका है। इस बार उनका तबादला बीज निगम में किया गया है जहां जूनियर अफसरों को भेजा जाता है। खेमका कहते हैं कि सरकार किसी भी पार्टी की रही हो, उन्हें हर बार अपनी ईमानदारी की सजा भुगतनी पड़ी क्योंकि वे लगातार घपलों और घोटालों का पर्दाफाश करते रहे हैं। उन्होंने किसानों के हक में काफी काम किया। हाल ही में गुड़गांव के कई गावों की पंचायती जमीन को बिल्डरों के हाथ में जाने से बचाया। खेमका ने बिल्डरों की मदद करने वाले अफसरों के ख़िलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। लेकिन हरियाणा सरकार ने आरोपी अफसरों पर कार्रवाई करने की जगह, खेमका का ट्रांसफर कर दिया।












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