राजनाथ सिंह के ताबड़तोड़ बयान और भाजपा का वेलकम बोर्ड
[नवीन निगम] लीजिए भाजपा में भी अन्य पार्टियों के लिए वेलकम का बोर्ड लग गया। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव के बाद बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाने की स्थिति में उनकी पार्टी के लिए चुनाव बाद गठबंधन का विकल्प खुला हुआ है। राजनाथ का बयान दो बातें कह रहा हैं। पहली, भाजपा को महसूस हो रहा है कि बगैर सहयोगियों के आगे चलकर सरकार बनाने में वह असमर्थ हैं और दूसरी, भले ही भाजपा मोदी के नाम पर चुनाव लड़े लेकिन पीएम कौन बनेगा इसका फैसला परिणाम आने के बाद ही तय होगा।
राजनाथ सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 24 दलों की गठबंधन सरकार के सफलतापूर्वक चलने का हवाला देते हुए कहा, भाजपा का पहला लक्ष्य अपने बूते 272 के आंकड़े तक पहुंचना है, अगर बीजेपी इस जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाती है तो चुनाव बाद गठबंधन करने का विकल्प खुला हुआ है।
अर्थात राजनाथ कह रहे हैं कि चुनाव के बाद सहयोगियों की कमी नहीं होगी और भाजपा में पीएम प्रत्याशी को लेकर कोई समस्या नहीं हैं। इन दोनों बातों को यदि एक साथ ले तो बात साफ हो जाएंगी कि भाजपा चुनाव तो मोदी के नेतृत्व में लड़ेगी लेकिन बहुमत न आने पर उनसे किनारा करने में भी एक मिनट नहीं लगाएंगी। क्योंकि राजनाथ जिन सहयोगियों की ओर इशारा कर रहे हैं, वह सहयोगी भाजपा के साथ एक ही शर्त पर आएंगे और वह शर्त होगी मोदी पीएम नहीं। आइये जानते है कि अचानक भाजपा में नेताओं के सुर क्यों बदलने लगे।

राजनाथ का पीएम उम्मीदवारी में पीछे हटना
अभी तक मोदी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे राजनाथ सिंह को जब संघ ने यह इशारा किया कि चुनाव बाद यदि मोदी पीएम न बन सके तो यह पद आडवाणी खेमे की सुषमा स्वराज्य के पास जाएंगा तो राजणाथ सिंह को झटका लगा है क्योंकि पहले वह ऐसी दशा में अपने को पीएम मानकर चल रहे थे। इसीलिए अब राजनाथ दोनों खेमों को बराबर साधकर चलना चाह रहे हैं।

मोदी के बयानों से पार्टी बेचैन
पिछले एक महीने में मोदी ने कुत्ता और बुर्का पर जिस तरह बयान दिए उसके बाद संघ को भी यह बातें पसंद नहीं आई है। संघ चाहता था कि चुनाव विकास और कांग्रेस के भष्ट्राचार के इर्दगिर्द रहे, लेकिन मोदी के बयानों से कांग्रेस को राहत मिल रही है। इसे लेकर भाजपा ही नहीं अब संघ भी चिंतित हैं।

आडवाणी खेमे का प्रसन्न होना
पिछले दिनों जबसे आडवाणी नागपुर में संघ प्रमुख से मिलकर आए है तबसे भाजपा में माना जा रहा हैं कि आडवाणी खेमा मजबूत हुआ है। उसका सीधा गणित है कि यदि चुनाव बाद भाजपा सहयोगियों के साथ सत्ता तक नहीं पहुंची तो मोदी की जगह सुषमा स्वराज्य या आडवाणी खेमे से किसी अन्य नाम आगे करके सहयोगी एकत्र किए जाएंगे।

सर्वे रिपोर्ट भाजपा के अनुकूल नहीं
वैसे चुनाव अभी नहीं हो रहे हैं लेकिन कुछ समाचार चैनलों ने चुनाव की बाबत सर्वे कियाहै जिनके परिणाम को भले ही राजनेतिक पार्टियां झुठला दे लेकिन उनसे एक बात तो ऊभर कर सामने आ रही है कि अगले लोकसभा में नवीन पटनायक, नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, जयललिता, डीएमके और बसपा जो एनडीए की कभी न कभी सहयोगी रही है वह अच्छी सीटें ला रही है और इन्हें खुश रखने के लिए भाजपा को चुनाव पूर्व ही तैयारी करनी पड़ेगी।












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