यूपी के दिल में है चिंगारी, ओपीनियन पोल से निकला धुआं

[नवीन निगम] आईबीएन ने अपने ओपिनियन पोल में उप्र में जो नए राजनीतिक समीकरणों का संकेत दिया है वह चौंकाने वाला हैं। जो पार्टियां ओपिनियन पोल में पिछड़ रही है उनका सीधा सा जवाब है कि इस ओपिनियन पोल में कोई सच्चाई नहीं।

चलिए मान लेते है कि सच्चाई नहीं है, लेकिन आज चैनलों के बीच इतनी ज्यादा प्रतिस्पर्धा है कि कोई भी चैनल किसी पार्टी के लिए फर्जी ओपिनियन पोल नहीं करेगा, क्योंकि ऐसा करने और इस बात के खुल जाने के बाद उसके चैनल की रेटिंग गिर सकती हैं।

फिलहाल आईबीएन ने जो ओपिनियन पोल दिखाया है उससे एक बात का संकेत तो मिलता है कि जनता बड़े बदलाव के मूड में हैं। आइये जानते है कि आखिर ओपिनियन पोल किस खास बात को बता रहा हैं।

ओपिनियन पोल कहता है कि भाजपा को उप्र में 29 से 33 सीट मिल सकती हैं। क्या यह संभव हैं, इस बारे में मेरा यही मानना है कि पिछली बार लोकसभा में उप्र से कांग्रेस को 22 सीटें मिली जो कांग्रेस ने सपने में भी नहीं सोचा था। अब देखना है कि 2014 में राहुल फैक्‍टर कितना काम आता है।

आईये जानते हैं कुछ खास बातें...

सपा सरकार की नाकामी

सपा सरकार की नाकामी

यदि आज भाजपा के उप्र में आगे बढऩे का कारण पूछा जाए तो वह नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता नहीं बल्कि अखिलेश सरकार की नाकामी है। अपराध, गुंडागर्दी ने सरकार की कुछ एक अच्छाइयों पर भी पर्दा डाल दिया है। पूरे प्रदेश में आज जनता सिर्फ दो बातें करती दिखाई पड़ती है एक कांग्रेस की महंगाई और दूसरी प्रदेश में बढ़ती गुडांगर्दी की। सपा का झंडा लगाए गुडांगर्दी की गवाह बन रही सफेद स्कार्पियां गाडिय़ां सपा के खिलाफ जनमत तैयार करती चली जा रही हैं। लोग चुपचाप अपना मन बनाते जा रहे हैं।

कांग्रेस से नाराज जनता

कांग्रेस से नाराज जनता

जमीन पर कांग्रेस का जातीय समीकरण कुछ अच्छा नहीं है लेकिन उसके बाद भी भाजपा को वोट देने वाला एक बड़ा तबका जिसमें ऊंची जातियां शामिल थी, ने कांग्रेस को वोट दिया था।

कांग्रेस नेताओं के अजीबो गरीब आचरण और व्यवहार से यह वोट बैंक उससे छिटककर भाजपा के पास जा रहा है यह जमीनी हकीकत है और क्योंकि यह वोट कुछ विशेष स्थानों पर केद्रित है इसलिए ओपिनियन पोल सही कहता है कि भाजपा कम वोट लाकर भी अधिक सीटें ला ही हैं।

फायदा बसपा और भाजपा को

फायदा बसपा और भाजपा को

फायदा बसपा और भाजपा को ही मिलना हैं। क्योंकि लोकसभा चुनाव में बसपा बड़ी खिलाड़ी नहीं है इसलिए फायदा भाजपा को मिल रहा हैं। इस बात को सपा भी समझती है तभी पार्टी की तरफ से कई बार निर्देश जारी हुए कि लोग गाड़ी पर पोस्टर और झंडा न लगाए, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं। ओपिनियन पोल कहता है कि समाजवादी पार्टी का जलवा ढलान पर आ सकता है। 26 फीसदी लोग ही अखिलेश सरकार को बेहतर मान रहे हैं।

सपा से नाराजगी आखिर क्यों?

सपा से नाराजगी आखिर क्यों?

ओपिनियन पोल में सपा से लोगों की नाराजगी के बारे में भी बताया गया है। जहां तक रोजगार के मौकों का सवाल है 41 फीसदी लोग कहते हैं कि कोई बदलाव नहीं लेकिन 30 फीसदी का मानना है कि रोजगार दरअसल घटे हैं। हत्याए, अपहरण और अपराध के बारे में 45 फीसदी का कहना है कि ये भी बढ़े हैं। 32 फीसदी लोगों का कहना है कि प्रदेश में जातिगत हिंसा बढ़ी है हालांकि, 44 फीसदी के मुताबिक इसमें बदलाव नहीं आया। 51 फीसदी लोगों का कहना है कि यूपी में गुंडागर्दी बढ़ी है।

पिछडी जातियां और कल्याण-मोदी का समीकरण

पिछडी जातियां और कल्याण-मोदी का समीकरण

ओपिनियन पोल में एक खास बात पर ध्यान नहीं दिया गया है कि इस बार भाजपा का पीएम उम्मीदवार एक अति पिछड़े वर्ग से हैं और स्वाभाविक है कि पिछड़ों में इस बात को लेकर काफी सरगर्मी है।

पिछड़ों खासतौर पर अति पिछड़ों में मोदी को लेकर एक अलग ही उत्साह नजर आ रहा हैं वह मोदी के हिंदुत्व से कम इस बात से ज्यादा प्रसन्न हैं कि भाजपा की तरफ से शीर्ष पद के लिए एक अति पिछड़ें को आगे लाया गया हैं। कल्याण सिंह के साथ मोदी का साथ इसे और हवा दे रहा हैं।

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