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Exclusive : मित्रा के सवालों में ‘चंदन’ भी!

By Kanhaiya
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अहमदाबाद। भारतीय जनता पार्टी ने चंदन मित्रा के बयानों से पल्ला झाड़ लिया। चंदन मित्रा भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य हैं और उससे भी बढ़ कर एक पत्रकार-सम्पादक हैं। भाजपा द्वारा उनके बयान से पल्ला झाड़ना पार्टी की अपनी मजबूरी हो सकता है, तो दूसरी तरफ मीडिया को अमर्त्य सेन पर चंदन मित्रा की टिप्पणियों में मोदी समर्थन की बू महसूस हो सकती है। इस मुद्दे में भाजपा और मीडिया के आलोक में दो विरोधाभास सामने आते हैं। पहला यह कि अमर्त्य सेन को भारत रत्न देने वाली सरकार के प्रधानमंत्री भारतीय जनता पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी थे, तो दूसरा विरोधाभास यह है कि सेन पर हमला करने वाले चंदन मित्रा को घेरने वाले मीडिया ने अमर्त्य सेन के कुतर्क को महज एक बयान के रूप में दिखा दिया।

खैर, सबकी अपनी-अपनी मजबूरियाँ हो सकती हैं। जहाँ तक अमर्त्य सेन को लेकर चंदन मित्रा की ओर से उठाए गए सवालों का सवाल है, तो कहना होगा कि अपने-अपने राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोणों से देखने वालों को भले ही इसमें मोदी समर्थन की बू या बदबू आती हो, परंतु मित्रा द्वारा उठाए गए सवालों में कहीं न कहीं चंदन की खुशबू भी घुली हुई है। उनके उठाए सवाल पूरी तरह अनुचित भी नहीं हैं।

भारत रत्न की महिमा इस देश में कौन नहीं जानता? क्या इस बात से भारत रत्न की महिमा का अंदाजा नहीं हो आता कि पिछले पाँच वर्षों में इसे पाने योग्य कोई भारतीय सरकार को नहीं मिला है? अगर भारत रत्न वास्तव में इतना महिमापूर्ण है, तो इसे पाने वाले पर उसकी लाज रखने की बड़ी जवाबदेही भी तो बनती है?

आखिर चंदन मित्रा ने अपने ट्वीट के जरिए भारत रत्न की महिमा का ही तो बखान करने की कोशिश की है। इसमें इतना हंगामा क्यों है बरपा? संभव है उन्होंने अपनी बात थोड़ी खीज में कही हो, लेकिन खीज की इस कथित बदबू में उनके द्वारा उठाए गए सवालों से मुँह कैसे फेरा जा सकता है। चंदन मित्रा के सवालों में चंदन की महक भी है, यदि गौर से और विशाल दृष्टिकोण से सोचा जाए।

दरअसल अमर्त्य सेन ने कहा था कि वे नहीं चाहते कि नरेन्द्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हों। सेन की इस टिप्पणी पर भाजपा की ओर से सधी हुई प्रतिक्रिया ही आनी थी, परंतु चंदन मित्रा खुल कर सामने आ गए और उन्होंने सेन की टिप्पणी पर एक के बाद एक चार ट्वीट कर दिए। उनके ट्वीट से मीडिया में प्रमुखता से उभर कर यही बात सामने आई कि चंदन मित्रा ने अमर्त्य सेन से भारत रत्न छीनने की बात कह दी और इसी से घबराई भाजपा ने उनके बयान से पल्ला झाड़ लिया, लेकिन मीडिया की इस बदजुबानी और भाजपा की घबराहट में मित्रा के तीन ट्वीट में उठाए गए सवाल दब कर रह गए।

आइए तसवीरों के साथ करते हैं विश्लेषण :

मोदी को नहीं देख सकता प्रधानमंत्री

मोदी को नहीं देख सकता प्रधानमंत्री

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, नोबल पुरस्कार विजेता और भारत रत्न अमर्त्य सेन ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे एक भारतीय नागरिक के रूप में नरेन्द्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री नहीं देखना चाहेंगे। उनकी इस टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद।

मित्रा हुए मुखर

मित्रा हुए मुखर

अमर्त्य के इस बयान पर मीडिया ने तो केवल चुटकियाँ लीं और भाजपा ने महज असहमति जता दी, परंतु चंदन मित्रा मुखर हो गए और उन्होंने एक के बाद एक चार ट्वीट कर डाले।

चंदन की बजाए विवाद

चंदन की बजाए विवाद

चंदन मित्रा के चार ट्वीट में से तीन ट्वीट में उठाए गए सवाल महत्वपूर्ण और जायज थे, परंतु मीडिया ने केवल उसी बात को हवा दी, जिसमें चंदन मित्रा ने अमर्त्य सेन से भारत रत्न वापस लेने की बात कही थी। दरअसल मित्रा के सवालों में चंदन भी था।

मुद्दे से भटकाव

मुद्दे से भटकाव

चंदन मित्रा ने 23 जुलाई को कुल चार ट्वीट किए। उन्होंने पहला ट्वीट किया कि अमर्त्य सेन कहते हैं कि वे नहीं चाहते कि मोदी भारत के पीएम बनें। क्या सेन भारत के मतदाता हैं? अगली एनडीए सरकार को उनसे भारत रत्न वापस ले लेना चाहिए। मित्रा का यह ट्वीट ही विवाद का कारण बन गया, जबकि उनके आगामी तीन ट्वीट विचारणीय थे।

अवांछित टिप्पणी

अवांछित टिप्पणी

अगले ट्वीट में चंदन मित्रा ने लिखा कि डॉ. सेन कृपा करके आप अपनी अवांछित टिप्पणी भारत पर न थोपें। हम सभी आपको गुजरे जमाने के अर्थशास्त्री के तौर पर जानते हैं, जो इन दिनों अपनी आजीविका के लिए कांग्रेस की विचारधारा बेचता है। मित्रा का यह ट्वीट एक तरह से लाजिमी है कि एक अर्थशास्त्री के रूप में उन्हें अवांछित इच्छा किसी पर थोपनी नहीं चाहिए।

समृद्ध परम्परा का खंडन

समृद्ध परम्परा का खंडन

तीसरे ट्वीट में चंदन मित्रा ने कहा कि वे लोग जो अमर्त्य सेन और भारत रत्न को लेकर मेरे बयान से निराश हैं, क्या आप मुझे किसी और आदमी का नाम बता सकते हैं जिसने भारत रत्न जीतने के बाद पार्टी आधारित राजनीति में हिस्सा लिया हो। मित्रा के इस ट्वीट के आलोक में देखें, तो अब तक भारत रत्न से सम्मानित ज्यादातर गैर राजनीतिक महानुभावों ने कभी ऐसी कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की। फिर वह सी. वी. रमन, मोक्षगुंडम विश्वेश्वरिया, धोंडो केशव कर्वे, बिधान चंद्र रॉय, पुरुषोत्तमदास टंडन, पांडुरंग वमन काणे, मदर टेरेसा, अब्दुल कलाम कलाम, सत्यजीत रे, एम एस शुभलक्ष्मी, पंडित रवि शंकर, लता मंगेशकर, बिस्मिल्ला खां, भीमसेन जोशी ही क्यों न हों। सेन की टिप्पणी समृद्ध परम्परा का खंडन तो करती ही है।

हंगामा क्यों है बरपा?

हंगामा क्यों है बरपा?

चौथे व आखिरी ट्वीट में उन्होंने लिखा कि भारत रत्न सम्मान पूरे देश का गहना है। भारत रत्न विजेता को किसी भी पार्टी या नेता के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए। डॉं.सेन को कांग्रेस की चुनावी टीम का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। शुक्रवार को चंदन मि‍त्रा ने कहा कि उन्‍हें खेद है कि उनका बयान कुछ ज्‍यादा ही बढ़चढ़कर था, इसके बावजूद वह अपना बयान नहीं बदलेंगे। आखिर हंगामा क्यों है बरपा?

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English summary
If Nobel prize winner Amartya Sen could not preseve his fairless as a Bharat Ratna, than we could not say that Chandan Mitra's anger fully unfair. Mitra's 3 tweets out of 4 are advisable and thinkable.
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