कांग्रेस के लिए डेन्‍जरस इश्‍क बने राहुल गांधी!

[नवीन निगम] कांग्रेस में इस समय सबसे बड़ा संकट क्या हैं तो कई उत्तर हवा में उछलेंगे, कोई कहेगा तेलंगाना, कोई भष्ट्राचार, कोई महंगाई तो कोई नरेंद्र मोदी। पर कांग्रेस के अंदर नया संकट यह नहीं हैं। ऐसे मामलों से कांग्रेस को निपटना बखूबी आता हैं। जो संकट इस समय कांग्रेस को परेशान कर रहा हैं और जिसका जिक्र दिग्विजय सिंह कर चुके हैं वो संकट हैं राहुल गांधी का पीएम बनने के लिए राजी न होना। सच पूछिए तो यह संकट नहीं बल्कि राहुल बाबा के प्रति वो डेन्‍जरस इश्‍क है, जिसकी डगर में खाईयां ज्‍यादा हैं।

मैं पहले भी लिख चुका हूं कि राहुल को सत्ता की हल्की सी भी चाहत नहीं है और वह इससे दूर रहना चाहते हैं। जिस व्यक्ति ने सत्ता और उससे मिलने वाली ताकत को हमेशा अपने आसपास देखा हो उसे सत्ता की क्या चाहत हो सकती हैं। दिग्विजय सिंह ने संकेत दिया है कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने इन दावों को खारिज किया कि भाजपा की ओर से इस पद के लिए नरेंद्र मोदी को पेश किया जाना कांग्रेस के लिए चुनौती है। दिग्विजय सिंह भले ही ज्यादा कुछ न कहे लेकिन वह जानते है कि आगे क्या परेशानियां खड़ी होने वाली हैं।

उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अगले साल होने वाले आम चुनाव में भी जीतती है, तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एक बार फिर इस सर्वोच्च पद के उम्मीदवार होंगे। कांग्रेस पार्टी चुनाव से पहले न तो मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करती है और न ही प्रधानमंत्री का। अब दिग्विजय सिंह के इस बयान पर गौर फरमाए कि कांग्रेस कभी भी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं करती है लेकिन दिग्विजय सिंह भी जानते है कि जो वह कह रहे हैं वह पूरी तरह सत्य नहीं हैं।

कौन प्रधानमंत्री होगा

कौन प्रधानमंत्री होगा

आजादी के बाद से कांग्रेस ने भाजपा की तरह घोषणा भले ही न कि हो लेकिन वोट देने वाली जनता को यह पता होता था कि कांग्रेस यदि जीतेंगी तो कौन प्रधानमंत्री होगा।

कांग्रेस की परंपरा

कांग्रेस की परंपरा

शुरुआत में जवाहर लाल नेहरू, फिर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और फिर सोनिया गांधी। 2004 के चुनाव में सोनिया गांधी को ही जनता ने प्रधानमंत्री के लिए चुना था लेकिन उन्होंने अंतिम समय में ताज मनमोहन सिंह के सर पर रख दिया। 2009 में भी तय था कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनेंगे।

1996 के चुनाव में

1996 के चुनाव में

सिर्फ 1996 के चुनाव में ही कांग्रेस बिना किसी नाम के चुनाव में उतरी थी और हर कोई जानता है कि उस चुनाव में कांग्रेस की क्या गत हुई थी। इसलिए दिग्विजय सिंह भले ही कहे कि पीएम घोषित करके कांग्रेस चुनाव नहीं लड़ती है, तो यह गलत हैं और ऐसा ही था तो दिग्विजय सिंह थोड़े दिनों पहले तक राहुल के पीएम बनने की माला क्यों जप रहे थे और अचानक कहने लगे कि कांग्रेस में पीएम घोषित करके चुनाव नहीं लड़ा जाता।

परेशानी दिग्विजय को नजर आयी

परेशानी दिग्विजय को नजर आयी

दिग्विजय सिंह भी समझ चुके है कि कांग्रेस ने यदि मनमोहन के नाम पर चुनाव लड़ा तो वह मुश्किल में पड़ जाएंगी और राहुल मान नहीं रहे हैं। जो परेशानी दिग्विजय सिंह को नजर आने लगी है वह थोड़े दिनों में आम कांग्रेसी की परेशानी होगी। ऐसे में कांग्रेस इसका क्या उपाय निकालेंगी इसे लेकर कांग्रेस दुविधा में हैं।

क्‍या होगा तब

क्‍या होगा तब

यदि यह परेशानी हर कांग्रेसी की समझ में आ गई, तो सबसे बड़ा संकट पार्टी के संगठन पर पड़ेगा। चुनाव आते-आते दिग्‍गज नेता टूट कर किसी अन्‍य दल में शामिल होने की सोचने लगेंगे। ऐसे में सबसे बड़ा लाभ अगर पहुंचेगा तो भाजपा को और उस दशा में चुनाव नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी नहीं होंगे।

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