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नेताओं पर लगी पाबंदी के बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले की होगी समीक्षा

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 supreme court
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद नेताओं के चुनाव लड़ने और वोट टालने पर पाबंदी लगा दी है। कोर्ट के फैसले के मुताबिक अगर किसी नेता पर मुकादमा चलता है और उन्हें दो साल से अधिक की सजा मिलती है सांसद और विधायकों की सदस्यता निरस्त कर दी जाती है।

वही कानूनी विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की प्रशंसा की है। विशेषज्ञों ने कहा कि इसे समीक्षा के लिए लाया जा सकता है, क्योंकि कई मुद्दों को स्पष्ट करने की जरूरत है। कानूनी विशेषज्ञों की माने तो सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का गलत इस्तेमाल हो सकता है। चुनावों से पहले अपने प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बनाने के लिए नेताओं द्वारा इसका दुरुपयोग करना भी शामिल है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला समाज पर व्यापक प्रभाव डालने वाला है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि जो व्यक्ति जेल में है या पुलिस हिरासत में है वह विधायी निकायों के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता।

कोर्ट के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व अतिरिक्त सोलीसीटर जनरल अमरेन्द्र सरन मानते है कि इससे राजनीति में व्याप्त अपराधीकरण कम होगा। लेकिन जानकर मानते है कि इसमें कुछ परिवर्तन करने की जरुरत है ताकि इसका गलत इस्तेमाल नहीं हो सके।

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English summary

 
 Legal experts hailed the spirit of the SC verdict barring jailed people from contesting elections but said it may come up for review as several issues need to be clarified.
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