शब्बीर हत्याकांड़ः पुलिस के दावे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से शव संदिग्ध!

Murder Case
बांदा। उत्तर प्रदेश में बांदा शहर के अलीगंज निवासी सब्जी व्यवसायी शब्बीर के अपहरण और उसके बाद हत्या के मामले को पुलिस भले ही सुलझा लेने का दावा कर रही हो, लेकिन पुलिस के दावे और बरामद किए गए शव के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में घालमेल न होने से एक बार फिर उंगली उठना शुरू हो गई है। पुलिस आरोपितों के बयानों के आधार पर शब्बीर की गोली मार कर हत्या किया जाना बता रही है, जबकि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट गला घोटने से मौत का कारण दर्शा रही है। इन विरोधाभासी तथ्यों से बरामद शव ही संदिग्धता के घेरे में आ गया है।

बांदा और फतेहपुर की पुलिस ने गुरुवार को ललौली थाने के दतौली इलाके में यमुना नदी से एक शव का कंकाल बरामद किया था, गायब सब्जी व्यवसायी शब्बीर के परिजन कमीज और जींस के आधार पर शव शब्बीर का होना बताया था। इसी दिन बांदा शहर कोतवाल/विवेचक उमाशंकर यादव ने मुख्य न्यायिक दंड़ाधिकारी (सीजेएम) बांदा आनंद प्रकाश (द्वितीय) की अदालत में जेल में कैद जितेन्द्र व साबिर को रिमांड में लेने की जो अर्जी दाखिल की, उसमें सीआरपीसी की धारा-161 के तहत लिए गए बयानों का जिक्र किया है।

अदालत में दिए शपथ पत्र में विवेचक ने आरोपी साबिर के बयान को इस प्रकार उदृत किया है, ‘मैं (साबिर खां), जितेन्द्र शर्मा, मुबीन व शकील गाड़ी से उतरे तो हम लोगों को गाड़ी से उतरता देख इंडिगो कार में बैठा शब्ीर कार से उतर कर सड़क के पश्चिम की ओर तेजी से भागा तो हम सभी लोगों ने शब्बीर के ऊपर जान से मारने की नियत से अपने-अपने असलहों से समय करीब नौ साढ़े नौ बजे रात फायर किए। मेरे पास 315 बोर का तमंचा, शकील व मुबीन के पास भी 315 बोर के तमंचे और जितेन्र्द शर्मा के पास 32 बोर का रिवाल्वर थी। गोली लगने से शब्बीर गिर गया तो हम सफारी गाड़ी में बैठ कर शब्बीर को गाड़ी में डालकर बेंदाघाट की ओर जाकर यमुना नदी के किनारे शब्बीर को उतारा। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। उसी शब्बीर के साथ पत्थर बांधकर यमुना नदी में डाल दिया था।'

पुलिस को दिए अब दूसरे आरोपी जितेन्द्र शर्मा के बयान पढ़ें, ‘मैं अपनी सफारी गाड़ी नम्बर-यूपी 90, एफ-3786 से मेरा ड्राईवर साबिर खां 315 बोर तमंचे के साथ, मैं 32 बोर रिवाल्वर के साथ तथा मुबीन व शकील 315 बोर तमंचे के साथ चले कि दीप ढाबा के आगे चलने पर कल्लन का फोन आया और उसने बताया कि हम लोग नरैनी रोड़ पर मिसकीन बाबा की मजार पर अगरबत्ती जला रहे हैं।' पुलिस के मुताबिक, जितेन्द्र शर्मा ने यह भी बताया कि ‘जिस स्थान पर शब्बीर को नदी में फेंका है, वह वहां चलकर ही बता पाऊंगा। मैंने अपनी रिवाल्वर छिपा कर रख दी है।' पुलिस के इसी तर्क से सहमत होकर स्थानीय अदालत ने जितेन्द्र व साबिर को पांच दिनों का पुलिस रिमांड मंजूर किया है। पुलिस पांच दिनों के रिमांड में आरोपियों से हत्या में प्रयुक्त असलहा बरामद करेगी।

फतेहपुर की सरकारी अस्पताल में जिस लाश को शबबीर की लाश बताकर पुलिस व उसके परिजनों ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया है, उसमें चिकित्सकों की राय पढि़ए, मुख्य चिकित्सा अधिकारी फतेहपुर डाॅ. सज्जन कुमार के मुताबिक, ‘पोस्टमार्टम हाउस प्रभारी दिलीप सिंह पटेल की देख-रेख में चिकित्सक डी.के. वर्मा ने कंकाल का पोस्टमार्टम किया, कंकाल में फायर व धारदार हथियार के कहीं भी निशान नहीं मिले, जिसके आधार पर चिकित्सीय टीम का अनुमान था कि अंगौछे से गला घोंटने से मौत हुई है। मृतक की बरामद कमीज व जींस में भी फायर व धारदार हथियार के निशान नहीं हैं। इस व्यक्ति की मौत संभवतः सात दिन पूर्व हुई है।'

पुलिस लगातार यह साबित करने के प्रयास में जुटी रही कि शब्बीर की हत्या गोली मार कर की गई है। इस मामले में पुलिस की यह दूसरी गलती उजागर हुई है। रविवार को पुलिस के एक अधिकारी ने मृतक का मोबाइल सर्विलांस के जरिए बड़ोखर गांव के इच्छाराम सैनी की पत्नी राजकुमारी के यहां से बरामद होने की बात कबूली थी और सोमवार को गैर नामजद आरोपी मुबीन की चालानी रिपोर्ट में उसकी निशानदेही पर बरामद होना दर्शाया था। अब हत्या की थ्योरी में पुलिस कुछ कह रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मौत का कारण अलग ही बता रही है। ऐसे में जिस लाश को शब्बीर की लाश बताकर पोस्टमार्टम कराया गया और परिजन भारी हंगामा करने के बाद शुक्रवार की मध्य रात कब्रिस्तान में दफन किया है, उसकी वास्तविकता पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि जिलाधिकारी बांदा जीएस नवीन कुमार ने बताया कि ‘शव की कुछ हड्डि़यों के हिस्से डीएनए जांच के लिए ले लिए गए हैं, विवेचक विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ में इसकी जांच कराएंगे।' चित्रकूटधाम परिक्षेत्र बांदा के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) सुग्रीव गिरि भी डीएनए जांच कराने विषयक एक पत्र शासन को भेजा है। अधिवक्ता संघ बांदा के पूर्व अघ्यक्ष और फौजदारी मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता रणवीर सिंह चैहान का कहना है कि ‘आरोपियों की निशानदेही पर मृतक का टूटा मोबाइल बरामद होने से यह साबित होता है कि उस स्थान पर मृतक था और वहां से ही उसका अपहरण हुआ है। हत्या कैसे और कहां हुई? इसका कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। डीनएनए जांच में यदि शव शब्बीर का पाया गया तो संभव है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों को न्यायालय से दंडि़त करा सकें, अगर शव शब्बीर का न साबित हुआ तो बड़ा मुश्किल होगा।'

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