महाराजगंज उपचुनाव के नतीजे से गरमाई मोदी पर राजनीति
पटना। बिहार के महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव में जनता दल (युनाइटेड) के प्रत्याशी की करारी हार के बाद न केवल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख घटक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं के तेवर आक्रामक हो गए हैं, बल्कि ये नेता गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर 'फ्रंटफुट' पर नजर आ रहे हैं। लेकिन राजग में शामिल जद (यू) भी मोदी को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रही। ऐसे में एकबार फिर मोदी को पर बिहार की राजनीति गरमा गई है।
हालांकि दोनों पार्टियों के नेता गठबंधन को लेकर किसी तरह की समस्या होने की बात से इंकार कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता राजीव प्रताप रूड़ी ने पटना में कहा कि भाजपा के साथ-साथ जद (यू) को भी नरेन्द्र मोदी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिहार में एक पार्टी नहीं, पूरा गठबंधन हारा है। यदि जीत के लिए जरूरी हो तो राजग शासित दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी चुनाव प्रचार में बुलाना चाहिए। आज राजग ही नहीं, पूरे देश को एक नेता की जरूरत है।

भाजपा नेता और बिहार सरकार में मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मोदी देश के सर्वमान्य नेता हैं। उन्हें कोई नहीं नकार सकता। रूड़ी के इस बयान पर पलटवार करते हुए जद (यू) के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि पार्टी अपनी जरूरत खुद तय करेगी। इस पर किसी को कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। जद (यू) ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में ही अपना नजरिया साफ कर दिया था। हमें उसी बात को लेकर बार-बार कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
इस बीच, महाराजगंज लोकसभा उपचुनाव में विजयी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रत्याशी प्रभुनाथ सिंह ने भी स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि चुनाव में जद (यू) के लोगों ने भी उनका बखूबी साथ दिया है। प्रभुनाथ ने कहा कि इस पार्टी के पुराने साथियों से उनका व्यक्तिगत रिश्ता है, जिसे उन्होंने इस चुनाव में निभाया। राजनीतिक जानकार सुरेंद्र किशोर भी मानते हैं कि महराजगंज उपचुनाव में जद (यू) उम्मीदवार को राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और प्रभुनाथ सिंह के साथ-साथ नरेन्द्र मोदी की अदृश्य ताकत से भी एक साथ मुकाबला करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मोदी विरोधी रुख से मोदी समर्थक खासा नाराज थे और वे नीतीश को सबक सिखाना चाहते थे।












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