छत्तीसगढ़ में किसी भी चुनौती के लिए तैयार: कांग्रेस

2000 में मध्य प्रदेश के बंटवारे के बाद छत्तीसगढ़ को एक अलग राज्य बनाया गया था। यहां साल के अंत तक मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के साथ ही विधानसभा चुनाव होना है। चुनाव में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजप) आमने-सामने होगी। मौजूदा समय में छत्तीसगढ़ में भाजपा सत्ता में है। राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह हैं।
जानकार सूत्रों के मुताबिक, पिछले कई महीनों से कांग्रेस अपनी जनसम्पर्क योजनाओं और 'परिवर्तन यात्रा' के जरिए अपना आधार मजबूत कर रही थी। कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति करने और हतोत्साहित कार्यकर्ताओं को एक नई दिशा देने को लेकर है। हरि प्रसाद ने कहा कि हम इसे आगे ले जाएंगे। कांग्रेस में नेताओं की कमी नहीं हैं।
स्थानीय कांग्रेसी नेताओं ने इस हत्याकांड को पार्टी के लिए गहरा धक्का बताया है, लेकिन उन्होंने सफर जारी रखने संकल्प लिया है और कहा है कि नेताओं का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस के विधायक दल के नेता रवींद्र चौधरी ने कहा कि यह एक गहरा झटका है। इस सदमे से उबरने में कुछ वक्त लगेगा, लेकिन बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
साजा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले चौबे ने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी। लोग हमारे साथ हैं और वे लोग भाजपा सरकार से बेहद नाराज हैं। स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के अनुसार, पार्टी प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में बूथ स्तर पर काम कर रही थी। पलारी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक शिव कुमार दहारिया ने कहा कि हम लोगों ने परिवर्तन यात्रा अप्रैल में शुरू की थी। हम 50 फीसदी से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचे।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी रैली की सफलता ने भाजपा को पिछले महीने 'विकास यात्रा' शुरू करने के लिए मजबूर कर दिया था। कांग्रेसी नेताओं ने बस्तर इलाके में भाजपा-माओवादी सांठगांठ की बात कही है। भाजपा वहां कांग्रेस के बढ़ते जनाधार से परेशान हो गई थी। कांग्रेस के एक स्थानीय नेता ने कहा, भाजपा ने 2008 के चुनाव के दौरान बस्तर के ग्रामीण इलाकों में धांधली की थी। वहां मतदान का प्रतिशत अचानक 20-25 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गया था।
स्थानीय नेताओं के मुताबिक 2008 के चुनाव में कांग्रेस ने अन्य हिस्सों में बढ़त बनाई थी। लेकिन भाजपा ने बस्तर क्षेत्र की 12 विधानसभा सीटों में से 11 सीटों पर कब्जा कर लिया था, जिससे कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा था। 91 सदस्यी विधानसभा में भाजपा के 49, कांग्रेस के 38, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दो विधायक हैं। एक मनोनीत सदस्य है, जबकि एक सीट रिक्त है।












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