नवजोत सिद्धू के ट्वीट से क्‍यों मची खलबली?

नई दिल्‍ली। क्रिकेटर नवजोत सिंह सिंह सिद्धू के एक ट्वीट ने शुक्रवार की सुबह तहलका मचा दिया। तहलका के साथ-साथ वो एक खलबली भी थी। तलका उन लोगों के लिये जो संसद के बारे में कुछ भी गलत नहीं सुन सकते, खलबली उनके लिये, सिद्धू के साथ संसद के अंदर बैठते हैं।

सिद्धू का ट्वीट- तमाम भ्रष्‍टाचार, विवादों और अनियमितताओं के बावजूद अगर संसद को पाक कहा जा सकता है, तो स्‍पॉट फिक्सिंग के बाद आईपीएल को इंडियन पाप लीग क्‍यों कहा जा रहा है। सिद्धू के इस ट्वीट पर बड़ा बवाल हुआ। उन्‍हें कई लोगों ने ट्विटर पर ही खरी खोटी सुना डाली, लेकिन सच तो यह है कि उन्‍होंने सच्‍चाई बयां की थी। वो खुद भी एक सांसद हैं और जाहिर है वो अपने साथी सांसदों के कारनामों से अच्‍छी तरह वाकिफ भी होंगे। बतौर क्रिकेटर उन्‍होंने अगर आईपीएल का बचाव किया, तो इसमें भी कुछ गलत नहीं किया।

Navjot Singh

अगर वित्‍तीय कारण देखें तो सिद्धू को आईपीएल से प्रति दिन लाख रुपए से ज्‍यादा मिलते हैं कमेंट्री करने के लिये। यही सोच लोगों को लगा कि शायद सिद्धू इसी कारण आईपीएल का बचाव कर रहे हैं, लेकिन अगर किसी ने सिद्धू को करीब से देखा है, तो कभी यकीन नहीं करेगा कि उन्‍होंने पैसे के लालच में आईपीएल की तारीफ की। अगर उनका अगला ट्वीट देखें तो आपको क्लियर भी जो जायेगा। उन्‍होंने अपने अगले ट्वीट में लिखा- राम जी और रावण, कृष्‍ण जी और कंस, गांधी जी और गोडसे की राशि एक थी, पर काम अलग-अलग। इसके बाद उन्‍होने लिखा- उसूल पर आंच आये, तो टकराना जरूरी है, और जिंदा हो तो जिंदा दिखना जरूरी है।

हो सकता है, कि यहां पर लोगों को लगे कि पैसे के खेल आईपीएल को इतना बढ़ावा क्‍यों‍ दिया जा रहा है, तो मैं कहना चाहूंगा कि सिद्धू उसके आयोजक नहीं, एक कर्मचारी की तरह आईपीएल से जुड़े हैं, जिसका उन्‍हें मेहन्‍ताना मिलता है। और फिक्सिंग के वो हमेशा से विरोधी रहे हैं।

यह सिद्धू की जिंदा दिली ही है, कि सांसद होते हुए भी वो साथी सांसदों को भ्रष्‍ट कहने में कतई नहीं हिचकिचाते भले ही वो उनकी खुद की पार्टी के क्‍यों न हों। क्‍योंकि सिद्धू जैसे लोग यथार्थ में जीते हैं और उसे ही स्‍वीकार करते हैं। खास बात यह है कि उनके आज के पहले ट्वीट से अगर किसी को मिर्ची लगी है तो वो देश के सांसद ही हैं। जनता को तो कहीं न कहीं खुशी ही हुई होगी। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि अगर यही बात अरविंद केजरीवाल ने कही होती, तो उनके ऊपर संसद का अपमान करने का एक और मुकदमा जरूर चल गया होता।

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