कोयला घोटाला : '1993 से अबतक के आवंटन रद्द हों'

बनर्जी ने हालांकि यह नहीं बताया कि आवंटन से राजस्व को कितना नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, "कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद कोयला मंत्रालय ने हमें इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।"
समिति की रपट में कहा गया है कि व्यापक प्राकृतिक संसाधन के इस प्रकार आवंटन से सरकार को बहुत मुनाफा नहीं हुआ, बल्कि केवल निजी क्षेत्रों को लाभ मिला, जिससे राज्य सरकारों को नुकसान हुआ।
रपट में कहा गया है, "आवंटित 218 ब्लॉक में से केवल 30 ब्लॉक में उत्पादन शुरू होना पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े करता है।"
रपट में यह भी कहा गया है कि आवंटियों ने गलत सूचना के आधार पर कोयला ब्लॉक का आवंटन हासिल किया। पूरे मामले की जांच की जानी चाहिए, लाइसेंस रद्द किए जाने चाहिए और ऐसी कंपनियों को काली सूची में डाल देना चाहिए।
समिति ने यह भी कहा कि नौकरशाहों तथा कोयला कंपनियों के बीच सांठगांठ रोकने के लिए एक मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता है। समिति ने केंद्र सरकार की यह दलील भी स्वीकार नहीं की कि उसकी जांच समिति ने वर्ष 2004-2009 के बीच कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से काम किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications