मप्र में भाजपा, कांग्रेस नेताओं के बेतुके बोल

बीता सप्ताह राजनीतिक घटनाक्रम के लिहाजा से भाजपा और सरकार के लिए अच्छा नहीं रहा है। हर मसले पर विरोधी दल को बैकफुट पर खड़ा होने को मजबूर कर देने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद इन दिनों बैकफुट पर खड़े नजर आ रहे हैं। सत्ता पक्ष का मनोबल गिरा हुआ है तो विरोधी दल हमले पर हमले किए जा रहा है।
सरकार के कैबिनेट मंत्री रहे विजय शाह ने झाबुआ में महिलाओं को लेकर अजीबोगरीब बयान दे डाला। उन्होंने तो मुख्यमंत्री की पत्नी का भी जिक्र कर सरकार व संगठन को मुसीबत में डाल दिया। आनन-फानन में सत्ता और संगठन ने शाह को तलब किया और उनसे इस्तीफा ले लिया।
अपना प्रभाव बरकरार रखने के लिए संगठन व सत्ता के लोग लगातार यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि शाह ने गलती की थी। लिहाजा, उन पर कार्रवाई की गई। वहीं शाह अपने खिलाफ साजिश रचने का डंका बजाए जा रहे हैं। शाह अपरोक्ष रूप से अपने विरोधियों पर न केवल निशाना साध रहे हैं, बल्कि यह प्रचारित कर रहे हैं कि उनसे इस्तीफा नहीं लिया गया है वह तो मंत्री पद को ठोकर मारकर आ रहे हैं।
सत्ता और संगठन अभी शाह के विवादित बयान से उबर भी नहीं पाई थी कि पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस नेताओं पर कटाक्ष कर डाला। उन्होंने कहा, "हमारे यहां कहा जाता है कि कांग्रेस नेताओं के घर में बेटा होता है तो कांग्रेस के लोग कहने लगते हैं कि इसमें भी भाजपा नेताओं का हाथ है।"
विजय शाह पर र्कावाई किए जाने के बाद तो संगठन व सत्ता से जुड़े लोगों ने अपने-अपने तरह से बयान दिए, मगर तोमर के बयान पर सब चुप हैं। तोमर खुद इस बयान को कोई विषय ही नहीं मानते हैं।
भाजपा जहां इन दो मसलों को शांत करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस ने भी भाजपा पर बेतुके हमले शुरू कर दिए। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कांति लाल भूरिया ने तो पशुपालन मंत्री अजय विश्नोई पर एक अफसर से बीवी की मांग तक करने का आरोप लगा डाला है। वहीं, विश्नोई का कहना है कि चुनाव करीब आते ही उनकी छवि को खराब करने की साजिश रची जा रही है।
एक तरफ भाजपा नेताओं के विवादित बयान पार्टी के सामने मुसीबत खड़ी कर रहे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस भी बेतुके हमले से बाज नहीं आ रही है। विवादित बयानों के चलते दोनों दलों में घमासान की संभावना बढ़ गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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