कोरिया में जंग छिड़ी तो भारत को मिल सकता है फायदा
(नवीन निगम) आज पूरा विश्व कोरियाई संकट से विचलित दिखाई पड़ रहा है। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम इल सुंग ने अपने देश में अपनी साख बढ़ाने के लिए भले ही अमेरिका से पंगा ले लिया है, लेकिन उत्तरी कोरिया के तानाशाह यदि यह सोच रहे हैं कि विश्व बिरादरी को डराकर वो अपने लिए कुछ सहुलियतें हासिल कर पाएंगे तो यह उनकी गलतफहमी है क्योंकि अमेरिका उत्तर कोरिया के खिलाफ मिले इस सुअवसर को हाथ से नहीं जाने देंगा।
उत्तरी कोरिया के तानाशाह यह सोच रहे है कि वह तनाव के अंतिम बिंदु तक जाकर वापस आ जाएगें तो यह उनकी भूल है क्योंकि यही भूल सद्दाम हुसैन ने की थी वह भी यही समझकर अमेरिका से टकराते रहे कि जब तक वह हमला नहीं करेंगे अमेरिका जंग नहीं शुरू करेगा। लेकिन अमेरिका ने मिसाइल दागकर अपनी तरफ से तब जंग का ऐलान कर दिया जब सद्दाम को लग रहा था कि विश्व बिरादरी बीच में पड़कर झगड़े को सुलझाने की पहल शुरू कर देगी।

उत्तरी कोरिया के मसले में केवल चीन ही ऐसा देश है जो उत्तरी कोरिया को इस मुशिकल से निकाल सकता था लेकिन तानाशाह किम इल सुंग के हठीले रवैये ने चीन को भी नाराज का दिया है। उत्तरी कोरिया को भले ही लग रहा हो कि उसके पास परमाणु बम है जो उसकी आक्रमण से रक्षा करेगा। लेकिन अमेरिका जो विश्व में अचानक कार्रवाई करने में माहिर रहा है, वह इसी बात को फायदा उठाएगा। विश्व के बड़े देशों को वह अचानक कार्रवाई क्यों करनी पड़ी उसका कारण उत्तरी कोरिया के परमाणु बम को अपने नियत्रंण में लेने की आवश्यकता को बताएगा। ऐसा करके वह पाकिस्तान जैसे देशों को भी एक संदेश देगा कि परमाणु बम होने से आप विश्व को बंधक नहीं बना सकते हैं।
कोरिया द्वीप में जंग वहां के ब्यापार को चौपट कर देगी। चीन की उत्तरी कोरिया से नाराजगी इसी बात को लेकर है। चीन इस इलाके में जंग नहीं होने देना चाहता क्योंकि जंग होने पर चीन और दक्षिण कोरिया में हुआ विदेशी निवेश भारत जैसे देशों की ओर मुडऩे लगेगा। क्योंकि हिंद महासागर एक शांत इलाका है और खाड़ी देश इस इलाके से नजदीक भी पड़ते हैं। इसलिए यदि कोरिया में जंग हुई तो भारत में विदेशी निवेश तेज होगा और चीन का सारा ध्यान फिर कोरिया द्वीप की ओर लग जाएगा। जंग के बाद उत्तरी कोरिया में अमेरिका की मौजूदगी उसे और चिंतित करेगी।












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