तुलसी प्रजापति मामले में अमित शाह को SC से बड़ी राहत

मोदी के करीबी को सुप्रीम से बड़ी राहत मिलने के साथ ही उनकी सीबीआई गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन केस में अमित शाह को मिली जमानत भी बरकरार रखी है और कोर्ट ने कहा है कि अभी सीबीआई उनकी गिरफ्तारी नहीं कर सकती है। मोदी के करीबी अमित शाह पर सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति एनकाउंटर केस में गंभीर आरोप हैं। अमित शाह की मांग थी कि सोहराबुद्दीन केस में मिली जमानत तुलसी प्रजापति केस में भी लागू हो।
न्यायमूर्ति पी सदाशिवम की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि प्रजापति और सोहराबुद्दीन की हत्याएं एक ही साजिश का हिस्सा थीं और दोनों मामलों में अलग अलग सुनवाई नहीं की जा सकती। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी शाह के खिलाफ सीबीआई प्रजापति हत्याकांड मामले में एक अलग आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है और जांच एजेंसी द्वारा शाह को गिरफ्तार किए जाने की भी संभावना थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी गिरफ्ता री पर रोक लगा दी गई है। इससे पहले अमित शाह सोहराबुद्दीन मामले में जेल जा चुके हैं। अमित शाह को 25 जुलाई 2010 को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।
3 महीने तक साबरमती जेल में रहने के बाद अमित शाह जमानत पर रिहा हैं। दिसंबर में चुनाव जीतने के बाद अमित शाह को बीजेपी महासचिव बनाया गया है। गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात के एंटी टेरेरिज़्म स्वॉयड ने हैदराबाद से उठाया था और नवंबर 2005 में फर्जी एनकाउंटर में दोनों की हत्या हुई थी। तुलसी प्रजापति इस केस का एकलौता गवाह था, जिसकी दिसंबर 2006 में एनकाउंटर कर दिया गया था। बाद में ये एनकाउंटर भी फर्जी पाया गया था। मामले की जांच कर रही सीबीआई ने नवंबर में तुलसी प्रजापति केस में अलग चार्जशीट दायर की है और अब अमित शाह की कस्टडी चाहती है। जो फिलहाल अभी मुमकिन नहीं हो पाएगा। वहीं कोर्ट के आदेश के बाद अमित शाह पर कौसर बी, सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के साथ साथ तुलसी राम प्रजापति का केस चलेगा और केस की सुनवाई मुंबई की अदालत में जारी रहेगी।












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