...तो इसलिये वेट एंड वॉच की स्थित में है भाजपा!

नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। ये राजनीति है, इसमें कब अपने पराये और पारये अपने हो जाएं पता ही नहीं चलता। शायद ये बात मुख्‍य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से समझ चुकी है और इसलिये सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने के मूड में नहीं है। आगे की बात करने से पहले आपको बता दें कि श्रीलंका में तमिलों के मुद्दे पर डीएमके ने केंद्र सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया है। यूपीए सरकार अब अल्‍पमत में आ गई है। हालांकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बाहरी समर्थन से सरकार में अभी सांस बची हुई है। केंद्र सरकार के बड़े हुक्‍मरानों ने यह दावा भी कर दिया है कि सरकार सुरक्षित है तो वहीं भाजपा ने भी साफ कर दिया है कि वो सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव नहीं लायेगी।

भले ही भारतीय जनता पार्टी इस संबंध में ये कहा रही हो कि सरकार लंगड़ी हो गई है और अविश्‍वास प्रस्‍ताव के बिना ही गिर जायेगी मगर हकीकत इससे कोसों दूर है। जानकारों की मानें तो मौजूदा सियासी हालात में भारतीय जनता पार्टी फूंक-फूंक कर कदम रखना चाहती है। भाजपा दरअसल सपा और बसपा के बल पर कोई भी जुआ खेलना नहीं चाहती।

BJP senior leaders
भाजपा को यह पता है कि अगर वो सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाती है तो मुलायम और मायावती सांप्रदायिक शक्तियों के साथ न जाने की अपनी मजबूरी बताकर उसके खिलाफ वोट करेंगे और सरकार को बचा लेंगे। वहीं भाजपा को यह भी पता है कि एक बार केंद्र सरकार बच गई तो उसे 6 माह के लिये अभयदान मिल जायेगा। यही वजह है कि जब तक मुलायम या मायावती में से कोई एक नेता खुलकर केंद्र सरकार से समर्थन वापस नहीं देता, भाजपा न चाहते हुए भी वेट एंड वॉच की नीति अपनाने पर मजबूर है। वो बस दुआ कर रही है कि सरकार अपने बोझ से गिर जाए।
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