श्रीलंका मुद्दे पर यूपीए का साथ छोड़ सकता है डीएमके

Karunanidhi
चेन्‍नई। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एम करुणानिधि ने रविवार को कहा कि यदि केंद्र सरकार ने श्रीलंका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में लाए जाने वाले अमेरिका समर्थित प्रस्ताव में संशोधन के लिए कदम नहीं उठाए तो वह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) से नाता तोड़ लेंगे। करुणानिधि ने संवाददाताओं से कहा, "यदि हमारे आग्रह को नहीं माना गया तो संप्रग से हमारा संबंध जारी नहीं रहेगा।"

करुणानिधि ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी को शनिवार को पत्र लिख कर केंद्र सरकार को यूएनएचआरसी में लाए जाने वाले अमेरिकी प्रस्ताव में संशोधन के लिए कदम उठाने का आग्रह किया है। करुणानिधि चाहते हैं कि यूएनएचआरसी घोषित करे कि श्रीलंकाई सेना और वहां के प्रशासकों ने ईलम तमिलों के खिलाफ नरसंहार और युद्ध अपराध को अंजाम दिया है।

उन्होंने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराध, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के उल्लंघन और तमिल आबादी के नरसंहार के आरोपों की जांच के लिए विश्वसनीय और स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय आयोग का गठन करने की पुरजोर मांग की है। अमेरिका को संशोधन मंजूर न होने के बारे में पूछे जाने पर करुणानिधि ने कहा, "यदि भारत ने संशोधन का प्रस्ताव नहीं रखा तो यह श्रीलंकाई तमिलों के लिए एक बड़ा अन्याय होगा।

इसीलिए हम कहते हैं कि तब हमारा गठबंधन में बने रहना अर्थहीन हो जाएगा।" गठबंधन से अलग होने की घोषणा के बाद संप्रग से किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में डीएमके के पांच सदस्य हैं। लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ संघर्ष के आखिरी चरण में 2009 में बड़े पैमाने पर तमिल नागरिकों के संहार के लिए श्रीलंका निशाने पर है।

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