नागालैंड में में एनपीएफ की जीत, कांग्रेस सदमे में
कोहिमा। गुरुवार को घोषित नागालैंड विधानसभा चुनाव परिणाम के मुताबिक राज्य में सत्ताधारी नागालैंड पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) की सत्ता बरकरार रहेगी। यहां पर एनपीएफ ने एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की है। पार्टी ने 60 सीटों वाली विधानसभा में 37 सीटों पर कब्जा किया है।निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस पार्टी को अभी तक चार सीटें मिली हैं और चार पर उसके प्रत्याशी बढ़त बनाए हुए हैं।
सत्ताधारी गठबंधन डीएएन के घटक के तौर पर मैदान में उतरे भारतीय जनता पार्टी और जनता दल-युनाइटेड ने एक-एक सीट पर विजय पाई है। एनसीपी ने पिछले चुनाव के मुकाबले अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है। 2008 के चुनाव में पार्टी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी और इस बार उसे चार सीटों पर जीत हालि हुई है।

नागालैंड के मुख्यमंत्री नीफू रियो की उत्तरी अंगामी सीट पर पांचवीं बार जीत के कगार पर हैं। शिक्षा मंत्री नयेवांग कोनयक हालांकि कांग्रेस के उम्मीदवार इशाक कोनयाक से अबोई सीट हार गए हैं। पुघोबोटो सीट पर एनपीएफ के वाई. विखेहो स्वु ने कांग्रेस के निर्वतमान विधायक जोशुआ सुमी को हराया। चुनाव मैदान में कुल 188 प्रत्याशी हैं।
कांग्रेस के लिये यह किसी बड़े सदमें से कम नहीं है, क्योंकि यहां पर राहुल गांधी ने काफी दम लगाया था। उनका एक भी तीर निशाने पर यहां नहीं लगा। इससे आने वाले विधानसभा चुनावों की तस्वीर भी खिंचती दिखाई दे रही है।
एनपीएफ सरकार को पिछले एक दशक से राज्य में कायम शांति के लिए किए गए प्रयासों का लाभ मिलने की उम्मीद थी। प्रचार के दौरान कांग्रेस का मुख्य जोर भ्रष्टाचार पर रहा। जहां एनपीएफ ने भाजपा और जद-यू के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया था, वहीं कांग्रेस को जीत के बाद समान विचारधारा वाली पार्टियों और स्वतंत्र रूप से चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों को अपने खेमे में करने का भरोसा था।
वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में एनपीएफ को 26 सीटें और कांग्रेस को 23 हासिल हुई थी। भाजपा और राकांपा ने दो-दो सीटें जीतीं थीं और सात निर्दलीय विधायक चुने गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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