क्या मुलायम सिंह का हाथ थामेंगे राजनाथ सिंह
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में काफी समय से सत्ता से बाहर भाजपा ने लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण की चर्चा के दौरान सपा से करीबी के संकेत दिये हैं। लोकसभा में चर्चा के दौरान सपा नेता मुलायम सिंह यादव ने अपने भाषण के दौरान कहा कि हम भाजपा के सीमा, भाषा और देशभक्ति के मुद्दे से पूरी तरह सहमत हैं और अगर वह कश्मीर और मुस्लिम मुद्दे पर अपने विचार बदले तो हम दोनों एक साथ आ सकते हैं। हमारे बीच की दूरियां खत्म हो सकती है। इस पर राजनाथ सिंह ने बोलते हुए कहा है कि हमारे बीच दूरियां हैं ही कहां, उन्होने यह भी कहा कि वह और मुलयम एक साथ आ सकते हैं? मुलायम का कहना है कि गरीबों और किसानों के मुद्दे पर भाजपा और सपा की नीतियां एक सी हैं।
इस घटनाक्रम ने एक नये राजनीतिक समीकरण के संकेत दे दिये हैं कि भाजपा और सपा अगले लोकसभा चुनाव में एक साथ आ सकते हैं। जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है। वहीं मुलायम भी कई बार यूपीए सरकार को समर्थन देने के बावजूद सरकार की निंदा ही करते रहे हैं, यहां तक कि रेल बजट के बाद भी उन्होने सरकार की निंदा की थी जो कि यह दिखाता है कि उनका सरकार के साथ होना, उनके लिए एक मजबूरी ही है।

वहीं भाजपा को भी एक उत्तर प्रदेश में एक मजबूत साथी की जरूरत है। बसपा तो सत्ता से बाहर है अत: सपा ही भाजपा की मदद कर सकती है। सपा नेता मुलायम ने खुद को एक धर्मनिरपेक्ष नेता के तौर पर प्रस्तुत किया है। उन्होने समय-समय पर खुद को मुस्लिमों और गरीबों के हितैषी के तौर पर पेश किया है। अगर भाजपा और सपा एक साथ आते हैं तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका होगा। ऐसे में कांग्रेस आय से अधिक सम्पत्ति के मुद्दे पर सपा को फिर से डराने की कोशिश कर सकती है। हालांकि इस विषय पर सपा नेता पहले से ही तैयार दिख रहे हैं, उन्होने आम बजट आने से पहले ही कहा है कि इस बजट से आम आदमी को कोई उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
सपा और भाजपा के नजदीक आने से राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं और भाजपा को इसका लाभ भी मिल सकता है।












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