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चिदंबरम की बात मानें, सोने में निवेश नहीं करें

बेंगलूरु। आम बजट 2013 के भाषण के दौरान केंद्रीय वित्‍तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "मैं देश के लोगों से अपील करता हूं, कि कृपया वे सोने में ज्‍यादा निवेश नहीं करें।" इस अपील के आगे उन्‍होंने कई तरह के सरकारी एवं निजी बॉन्‍ड पर दी जाने वाली टैक्‍स रियायत की बातें कही। आप सोच रहे होंगे, जब सोने के दाम तेजी से ऊपर उठ रहे हैं, तो उसमें निवेश क्‍यों न करें? इसका जवाब एक ही है अगर आप देश के आर्थिक ढांचे को गर्त में जाने से बचाना चाहते हैं या पेट्रोल के बढ़ते दामों पर लगाम कसते हुए देखना चाहते हैं, तो चिदंबरम की बात मानें।

इस संबंध में हमने बिजनेस वेबसाइट गुड रिटर्नस डॉट कॉम के एडिटर सुनील फरनांडीज़ से की तो उन्‍होंने वो तर्क दिया, जिसे सुनने के बाद आप भी शायद सोच में पड़ जायेंगे। सुनील फरनांडीज़ ने कहा, "हमारे देश में सोना नहीं है, हम जो भी निवेश करते हैं उसे बाहर से खरीद कर लाया जाता है। अब सोचिये अगर सोना देश में आयेगा तो उसके बदले में क्‍या जाएगा? वो है डॉलर और एक डॉलर के लिये इस समय हमें 46 से 48 रुपए तक देने पड़ रहे हैं। हम जितना ज्‍यादा से ज्‍यादा सोने पर निवेश करेंगे, रुपया उतना कमजोर होता जायेगा।"

उन्‍होंने आगे कहा, "आज रुपए की कीमत 48 रुपए है, तो आगे चलकर 50, 55, 65, 75 और एक समय आयेगा जब 100 रुपए का एक डॉलर हो जायेगा। जरा सोचिये आज हम एक लीटर पेट्रोल के लिये 73 रुपए देते हैं, यानी करीब पौने दो डॉलर। भविष्‍य में अगर रुपया कमजोर हो गया, तब एक लीटर पेट्रोल के लिये हमें 200 रुपए देना होगा। भविष्‍य में अगर ऐसा हुआ तो आप बाकी की चीजों के दामों का अंदाजा लगा सकते हैं।" सुनील फरनांडीज आगे कहते हैं कि यही कारण है कि वित्‍तमंत्री लोगों से सोने पर निवेश नहीं करने की अपील की है।

अब आप बताइये, क्‍या आपका नजरिया बदला? जरूर बदला होगा अगर ऐसा हुआ है, तो यह खबरें उन लोगों के साथ जरूर शेयर करियेगा जो सोने में इंवेस्‍टमेंट के अलावा कुछ नहीं सोचते। अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि निवेश कहां करें, तो नीचे कुछ विकल्‍प वित्‍तमंत्री ने सुझाये हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम (आरजीईएसएस) के उदारीकरण की घोषणा की, ताकि इसे आम लोगों के लिए आकर्षक बनाया जा सके।

बजट में निवेशकों को पहली बार सूचीबद्ध शेयरों के साथ-साथ म्यूचुअल फंड में निवेश करने की अनुमति दी गई है। निवेश केवल एक साल में नहीं, बल्कि लगातार तीन साल में किए जा सकेंगे। आय की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी गई है।

महंगाई से बचने के लिए चिदम्बरम ने मुद्रास्फीति-सूचक कोषों की घोषणा की। उन्होंने कहा, "भारतीय रिजर्व बैंक से सलाह-मशविरे के बाद मैं उन कदमों का प्रस्ताव करता हूं, जिससे महंगाई की स्थिति में भी बचत, खासकर गरीबों एवं मध्यम वर्ग की बचत को सुरक्षित रखा जा सके।" ये मुद्रास्फीति सूचक बांड या मुद्रास्फीति-सूचक राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमाण-पत्र हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "उपायों की संरचना एवं उसके अभिप्राय की घोषणा आने वाले समय में की जाएगी।"

चिदम्बरम ने आवासीय क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कर में छूट की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में पहली बार 25 लाख रुपये तक का आवासीय ऋण लेने वाले किसी भी व्यक्ति को ब्याज में एक लाख रुपये तक का कर छूट मिलेगा। उन्होंने कहा, "इससे घर खरीदने को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इस्पात, सीमेंट, ईंट, लकड़ी, कांच इत्यादि उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और निर्माण क्षेत्र में हजारों रोजगार सृजित होंगे।"

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