बसंत पंचमी के शाही स्नान में उमड़ा आस्था का सैलाब
इलाहाबाद। आस्था के महापर्व महाकुंभ में आज बसंत पंचमी के पर्व पर तीसरा और शाही स्नान हो रहा है। पिछले शाही स्नान यानी कि मौनी अमावस्या की तरह इस बार भी भीड़ काफी ज्यादा है लेकिन फिर भी इस बार सुरक्षा इंतजाम पहले से बेहतर नजर आ रहे हैं। आज करीब दो करोड़ लोगों के शाही स्नान की संभावना है। और करीब अभी तक पचास लाख तक लोगों ने संगम में डुबकी लगा ली है।
मालूम हो कि वसंत पंचमी के इस त्योहार में पीले रंग का खास महत्व होता है। यही वजह है कि इस अवसर पर ज्यादातर लोग पीले परिधान पहनते हैं। इसी ऋतु में खेतों में सरसों के पीले-पीले फूल खिलने से वातावरण मनोरम हो जाता है। तो वहीं आज मां सरस्वती की पूजा का प्रावधान है। खास कर बनारस में इस मौके पर मां सरस्वती की पूजा होती है और स्कूलों-कॉलेजों में सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
इस त्यौहार को पूरे भारत में ही अलग-अलग नामों और अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है। यूपी-बिहार के लोग आज के दिन जहां गंगा स्नान करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं वहीं ग्रामीण पंजाब में लोग आज सरसों के खेतों में इस पर्व को मनाते हैं और पतंगबाजी करते हैं। तो वहीं पश्चिम बंगाल में यह त्यौहार मां सरस्वती की पूजा करके मनाया जाता है।तो वही विकीपीडिया की माने तो वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है।













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